एसएसपी ने बताया कि आरोपी से पूछताछ के आधार पर दस घटनाओं का पर्दाफाश किया गया है। 25 जुलाई को शिवपुर सहबाजगंज निवासी कलावती देवी के साथ आरोपी ने जालसाजी की थी। सुबह की सैर पर निकलीं कलावती को रास्ते में आंटी कहते हुए जालसाज ने रोका और बोला कि आप के बेटे का क्या हाल है, वह पूछ पड़ीं कौन से बेटे, सागर का, तब उसने कहा कि सागर ने 40 हजार रुपये दिए हैं, आप के कंगन को मोटा कराना है। बातों में उलझाकर वह कंगन लेकर फरार हो गया था।
इसे भी पढ़ें: बारिश का असर: भूस्खलन से नेपाल में पोखरा-काठमांडो राजमार्ग बंद, यात्री फंसे
पुलिस ने केस दर्ज कर सीसीटीवी कैमरे की मदद से जांच की तो आरोपी पकड़ा गया। आरोपी ने बताया वह 9 महीने से इसी तरह से वारदात कर रहा है। इसके पहले हरपुर बुदहट, तारामंडल बाईपास रोड, नंदानगर, गोरखनाथ मंदिर रोड, खजनी के पास कटघर, सूरजकुंड, सहजनवां रोड, गगहा चौराहा पर वारदात कर चुका है। इसके अलावा बस्ती, देवरिया, कुशीनगर व संतकबीरनगर में भी उसने वारदात करने की बात कबूली।
एसएसपी ने बताया कि गिरफ्तारी करने वाली टीम में शामिल प्रभारी निरीक्षक शशिभूषण राय, पादरी बाजार चौकी प्रभारी पुरूषोत्तम आनंद सिंह, शैलेंद्र प्रताप सिंह सहित पूरी टीम को दस हजार रुपये का इनाम दिया गया है।
इसे भी पढ़ें: गोरखपुर में बोले सीएम योगी: माध्यमिक विद्यालयों के कायाकल्प के लिए मिलेंगे दो करोड़, सुरक्षा का दें विशेष ध्यान
एसपी सिटी ने बताया कि आरोपी ने अपने दोस्त झंगहा के जोगी यादव से बातों में उलझाकर अपना बताने का तरीका सीखा था। इसके बाद वह गुजरात चला गया। वहां पर फल का पिकअप चलाने लगा। पिकअप सुरेंद्र की खुद की है। वर्ष 2018 से वह जालसाजी करने लगा। बस्ती में एक बार गो तस्करी के आरोप में भी पकड़ा गया और उस पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई थी। उस पर कुल 20 केस दर्ज हैं। गोरखपुर में पांच, कुशीनगर में चार, सतंकबीरनगर में पांच, बस्ती में पांच, देवरिया में तीन केस दर्ज हैं। एक केस को छोड़कर सब जालसाजी, लूट के मामले हैं।
इसे भी पढ़ें: झोपड़ी में आग लगने से दिव्यांग की झुलसकर मौत, जिंदा जलाकर मारने का लगा आरोप
ढाई लाख की बाइक खरीदी, उसे पकड़ा गया
बुलेट से वारदात करने वाले सुरेंद्र ने कुछ दिनों पहले ढाई लाख रुपये की जावा बाइक खरीदी थी। उसने एक-दो वारदात में इसका इस्तेमाल किया। इसी बाइक और फुटेज की मदद से पुलिस आरोपी तक पहुंच गई। क्योंकि बुलेट बाइक तो बहुत से लोगों के पास है, लेकिन जावा बाइक की संख्या कम है। बचने के लिए वह नियमित रूप से अपराध नहीं करता था। एक-दो वारदात के बाद गुजरात चला जाता था और पुलिस भी पीछा छोड़ देती थी।