आजकल बच्चों में स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन का मामला कॉमन हो गया है। जिसके चलते युवा खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। बच्चे चाहते तो है अपनी बातें साझा करें पर ज्यादातर परिवारों में कोई भी ऐसा नहीं होता जो उन्हें समझे। अकेलापन तनाव को बढ़ाता है। इसके लिए जरूरी है कि लोग परिवार में अधिक से अधिक समय देने के साथ एक-दूसरे से संवाद स्थापित करें।
यह कहना है गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक परामर्श केंद्र की काउंसलर वत्सला पाठक का, जिन्होंने युवाओं में बढ़ते अवसाद पर एक अध्ययन किया है। अध्ययन में 15 से 29 वर्ष की आयु के लोगों को शामिल किया गया था। वत्सला का कहना है कि ज्यादातर युवाओं में पाया गया है कि किशोरों का मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के बारे में ज्ञान बेहद कम है। इसके लिए परिवार को जागरूक करने की जरूरत है। एक घर में कई लोग होते है और आज के समय में लोग अकेले ही समस्या को हल करना चाह रहे हैं।
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यदि बच्चे अपने घर के परिवार के सदस्य से जुड़ पाए तो वो इमोशनल सपोर्ट जो उन्हें अपने घर से प्राप्त होगा वो उन्हें बहुत रिलीफ दे सकता है। इसके साथ ही अभिभावक को ये चाहिए की अगर इस तरह की समस्या से जूझ रहा है या उसके व्यवहार में कोई परिवर्तन अचानक से दिख रहा है तो उससे बात करें और अपने बच्चों को स्वयं मनोवैज्ञानिक के पास ले जाएं।
उन्होंने कहा, स्वास्थ्य, साक्षरता और जागरूकता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अज्ञानता और दुष्प्रचार के नकारात्मक प्रभावों में कलंक और भेदभाव शामिल हैं। कुछ अध्ययनों ने भारत के संदर्भ में मानसिक स्वास्थ्य साक्षरता का मूल्यांकन भी किया है।
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युवाओं में अवसाद है आत्महत्या का मुख्य कारण
हाल के वर्षों में वैश्विक विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में मानसिक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण भूमिका की मान्यता बढ़ रही है। दुर्बलता का एक मुख्य कारण अवसाद है। 15 से 29 वर्ष की आयु के लोगों में आत्महत्या मृत्यु का चौथा सबसे आम कारण है। चिकित्सीय समस्याएं जो उनकी गंभीर मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों का कारण बनती हैं, उनकी वजह से उनकी मृत्यु जल्दी हो जाती है।
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लक्षण दिखते ही काउंसलर से मिलें
मनोवैज्ञानिक परामर्श केंद्र के काउंसलर शुभांकर राय ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के नकारात्मक होने के कई संकेत होते हैं, जैसे व्यवहार में परिवर्तन, सोने एवं खाने से संबंधित परिवर्तन, एकांत में रहना, सोशल मीडिया पर नकारात्मक पोस्ट्स लगाना आदि। ऐसे बदलाव यदि अपने घर में या आसपास किसी भी व्यक्ति में देख रहे हैं तो उन्हें काउंसलर से मिलने को प्रेरित करें ना की शर्माएं या अनदेखी करें।