नेहरू अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राजेश राय ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में हर दिन ओपीडी में 4500 से पांच हजार के बीच मरीज आते हैं। ये मरीज हर वार्ड में इलाज के लिए पहुंचते हैं। यही कारण है कि हर वार्ड की कल्चर जांच कराई जाती है, जिससे की बैक्टीरिया की सही जानकारी मिल सके और वार्ड को विसंक्रमित किया जा सके। हर दिन वार्ड में साफ-सफाई कराई जाती है।
एमआरएसए संक्रमण से चर्म रोग का खतरा
एमआरएसए संक्रमण शरीर के लिए ज्यादा खतरनाक है। यह चर्म रोग का खतरा पैदा करता है। इस बैक्टीरिया से शुरू में शरीर में लाल धब्बे होते हैं, जो धीरे-धीरे दर्दनाक फोड़े के रूप में तब्दील हो जाते हैं। वलेबसिएला न्यूमोनिया बैक्टीरिया पेट में गड़बड़ी पैदा करता है। इससे दर्द और अन्य समस्याएं होती हैं। इसके अलावा जांच में ई-कोली और स्यूडोमोनस बैक्टीरिया भी मिला है। ई-कोली बैक्टीरिया स्वस्थ लोगों और जानवरों की आंतों में रहते हैं। इनके शरीर में प्रवेश होने पर पेट में दर्द, खूनी दस्त, उल्टी शुरू हो जाती है। यह बैक्टीरिया भी मिला है। वहीं, स्यूडोमोनस बैक्टीरिया कम प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों के शरीर पर दुष्प्रभाव डालता है।