गलत तरीके से कुछ बिलों में सुधार कर निगम को चपत लगाने में महराजगंज खंड के एक्सईएन हरिशंकर, उपखंड प्रथम के एसडीओ ईश्वर शरण सिंह, खंड के लिपिक कार्यकारी सहायक रुद्र प्रताप पांडेय, राजकपुर गौड़, व अविनाश मणि पांडेय दोषी पाए गए है। इन्हीं पांचों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई थी।
इन्हें दी गई जांच
अधिशासी अभियंता एके सिंह, चंद्रेश उपाध्याय, अंजरी राय, विजिलेंस प्रभारी, महाराजगंज, धर्मेंद्र कुमार लेखाकार, लाल बिहारी, कार्यकारी सहायक
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आग लगी या लगाई गई...चर्चाएं कईं
बिजली दफ्तरों में आग लगी है या लगाई गई यह तो जांच का विषय है। लेकिन, चर्चाएं कई हैं। लोग यह भी कयास लगा रहे हैं कि एक हजार बिलों की जांच होनी थी, कहीं सबूत मिटाने के लिए तो आग नहीं लगा दी गई।
सूत्र बताते हैं कि पहली जांच के समय ही इन बिलों की जानकारी टीम को मिल गई थी। इसी आधार पर स्पेशल ऑडिट की टीम बनी। उपखंड में आग लगने से वहां रखे बिलों की फाइलें तो जल चुकी होंगी, लेकिन बिलिंग व्यवस्था ऑनलाइन होने से इसकी रिपोर्ट आसानी से निकल सकती है।
इसमें लिपिक और एसडीओ की आईडी पर ही बिलों में सुधार या उससे कम किया जाता है। ऐसे में अगर बिलों का डाटा स्पेशल ऑडिट की टीम के पास होगा तो किस- किस आईडी से बिलों में सुधार हुआ? किस आधार पर बिलों को घटाया गया? कॉमर्शियल बिल ही थे? या सिर्फ घरेलू, इन सभी पहलुओं पर जांच टीम काम कर सकती है।
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महाराजगंज के उपखंड प्रथम, द्वितीय और तृतीय में बुधवार की रात आग लग गई थी। इससे सरकारी दस्तावेज जलकर खराब हो गए। संबंधित को उक्त मामले में थाने में मुकदमा दर्ज करवाने के साथ ही जांच टीम भी गठित की गई है। महाराजगंज में चेयरमैन के निर्देश पर स्पेशल ऑडिट किया जाना है।
-आशु कालिया, मुख्य अभिंयता, गोरखपुर जोन।