उन्होंने सभी अफसरों की जवाबदेही तय कर दी है, ताकि विवेचक की मनमर्जी न चल पाए और सही व गलत के आधार पर ही विवेचना पूरी की जाए। इससे अब अफसरों को जानकारी होगी और हर महीने की समीक्षा में एसएसपी अलग से पूछेंगे कि आखिर नाम या धारा, बढ़ी या घटी तो इसका आधार क्या है? उम्मीद है इससे मनमानी पर अंकुश लगेगा।
सपा सरकार में बंद कर दी गई थी व्यवस्था
पहले यह व्यवस्था थी, लेकिन 2015 में सपा सरकार में कुछ जनप्रतिनिधियों के विरोध के बाद इसे बंद कर दिया गया था। उस समय अफसरों तक की जवाबदेही तो नहीं थी, लेकिन उनके हस्ताक्षर के बाद ही चार्जशीट आगे बढ़ती थी। अब अफसरों की ओर से इस पर सुझाव मांगा गया और फिर डीजीपी ने नया आदेश जारी कर दिया। अब इसमें सीओ और एडिशनल एसपी, एसएसपी तक की जवाबदेही तय कर दी गई है।
डीआईजी जे रविंद्र गौड़ ने कहा कि रेंज के सभी जिले को पत्र भेजकर इसकी समीक्षा करने को चेताया गया है। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर महीने मैं खुद बड़े मामलों की समीक्षा करूंगा, ताकि गुणवत्तापरक विवेचना हो सके।