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UP News: अब विवेचक ने किया खेल तो सीओ की भी तय होगी जवाबदेही, DIG ने सख्ती से पालन के लिए लिखा पत्र

Thu, 01 Sep 2022 03:16 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

डीआईजी जे रविंद्र गौड़ ने कहा कि रेंज के सभी जिले को पत्र भेजकर इसकी समीक्षा करने को चेताया गया है। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर महीने मैं खुद बड़े मामलों की समीक्षा करूंगा, ताकि गुणवत्तापरक विवेचना हो सके।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock
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विस्तार
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विवेचना में नाम और धारा घटाने या फिर बढ़ाने में विवेचक खेल नहीं कर पाएंगे। अब जैसे ही कंप्यूटर में घटाने या बढ़ाने की इंट्री होगी, पुलिस अफसरों को एसएमएस के जरिये इसकी जानकारी मिल जाएगी। सीओ ने अगर आपत्ति नहीं की और बाद में शिकायत में विवेचना में गलती पाई गई तो विवेचक के साथ सीओ की भी जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई होगी।

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एसएसपी को हर महीने अपराध गोष्ठी के दौरान ऐसे केसों (नाम व धारा, बढ़ाए या घटाए गए) हो की समीक्षा करनी होगी। डीआईजी जे रविंद्र ने बताया कि इसका पालन कराया जाएगा और हर महीने वह भी इसकी मॉनीटरिंग और समीक्षा करेंगे।

जानकारी के मुताबिक, कई बार गंभीर मामलों में चार्जशीट दाखिल होने के बाद विवेचक की मनमानी सामने आती है। आला अफसरों तक जब तक बात पहुंचती है और पूछताछ होती है तो सीओ रैंक तक के अफसर जानकारी होने से इन्कार कर देते हैं। ऐसे मामले बढ़ने पर डीजीपी ने विवेचना में गुणवत्ता लाने के लिए नया आदेश जारी कर दिया है।
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उन्होंने सभी अफसरों की जवाबदेही तय कर दी है, ताकि विवेचक की मनमर्जी न चल पाए और सही व गलत के आधार पर ही विवेचना पूरी की जाए। इससे अब अफसरों को जानकारी होगी और हर महीने की समीक्षा में एसएसपी अलग से पूछेंगे कि आखिर नाम या धारा, बढ़ी या घटी तो इसका आधार क्या है? उम्मीद है इससे मनमानी पर अंकुश लगेगा।

सपा सरकार में बंद कर दी गई थी व्यवस्था
पहले यह व्यवस्था थी, लेकिन 2015 में सपा सरकार में कुछ जनप्रतिनिधियों के विरोध के बाद इसे बंद कर दिया गया था। उस समय अफसरों तक की जवाबदेही तो नहीं थी, लेकिन उनके हस्ताक्षर के बाद ही चार्जशीट आगे बढ़ती थी। अब अफसरों की ओर से इस पर सुझाव मांगा गया और फिर डीजीपी ने नया आदेश जारी कर दिया। अब इसमें सीओ और एडिशनल एसपी, एसएसपी तक की जवाबदेही तय कर दी गई है।

डीआईजी जे रविंद्र गौड़ ने कहा कि रेंज के सभी जिले को पत्र भेजकर इसकी समीक्षा करने को चेताया गया है। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर महीने मैं खुद बड़े मामलों की समीक्षा करूंगा, ताकि गुणवत्तापरक विवेचना हो सके।

 
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