इसपर भी हाईकोर्ट की रोक लगा दी, फिर भाजपा सरकार ने ओबीसी की 18 जातियों को एससी की श्रेणी में शामिल करने का फैैसला लिया। यह मामला हाईकोर्ट के विचाराधीन था। अब फैसला गया है। इससे एससी समाज के लोग उत्साहित हैं। सबका कहना है कि अब किसी का हक नहीं मारा जाएगा। आरक्षण का पूरा लाभ मिलेगा।
राज्य सरकारें नहीं ले सकती हैं फैसला
महामंत्री ने कहा कि एससी में पहले ही 67 जातियां हैं। सबको मिलाकर 21 फीसदी आरक्षण मिलता है। ऐसे में 18 और जातियों को शामिल करने से आरक्षण कम हो जाएगा। समाज के लोगों को लाभ नहीं मिल पाएगा। पर्याप्त भागीदारी नहीं मिल पाएगी। एससी का दर्जा देने का फैसला राज्य सरकारें नहीं कर सकती हैं। इसके लिए संविधान संशोधित करना पड़ेगा। अगर ऐसा हुआ तो आरक्षण का दायरा भी बढ़ाना पड़ेगा।
जाति की राजनीति करने वाले राजनीतिक दलों को झटका
जातियों की राजनीति करने वाले छोटे राजनीतिक दलों को बड़ा झटका लगा है। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद लंबे समय से निषादों को एससी का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। इसी का हवाला देकर पहले सपा से हाथ मिलाया था, फिर भाजपा के सहयोगी बन गए। आरक्षण देने का दबाव भी बनाया था, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने इस मंशा पर पानी फेर दिया। गोरखपुर व उसके आसपास के जिलों में मल्लाह, केवट, निषाद व मझवार की संख्या अच्छी है। इन सबको एससी की श्रेणी में शामिल करने का फैसला लिया गया था। अब ऐसा नहीं हो सकेगा।