यहां आस-पास के रहने वालों का कहना है कि मजार की देखरेख वर्षों से होती आ रही है। यहां मुस्लिम ही नहीं हिंदू भी अपने शुभ काम की शुरुआत मजार पर कपूर और बत्ती जलाकर करते हैं। इस मोहल्ले के रहने वाले शेरू और बलराम कहते हैं कि सैयद बाबा तो सबके हैं। जो भी मन्नत मांगता है पूरी होती है।
वर्ष 1992 में अयोध्या की घटना के बाद जब पूरे देश में दोनों समुदायों के कुछ सिरफिरे लोगों ने अपनी हरकतों से नफरत फैलाने की कोशिश की तब भी यहां के लोगों का आपसी भाईचारा नहीं बिगड़ा। दोनों समुदाय के लोग उस दौरान भी मजार पर अगरबत्ती जलाते और फूल चढ़ाते रहे।