सपा एमएलसी सीपी चन्द की 12 साल बाद घर वापसी हुई है। वह 1999 में भाजपा के टिकट पर कैसरगंज से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। 2008 तक भाजपा में रहे लेकिन 2009 में सपा से जुड़ गए। सीपी चन्द का कहना है कि भाजपा से पुराना नाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विकास परक राजनीति अच्छी लगती है। अब घर वापसी की है। पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, उसका निर्वहन किया जाएगा।
सीपी चन्द ने बुधवार को लखनऊ में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इसपर गोरखपुर में जश्न मनाया गया। समर्थक सीपी चन्द के गोलघर स्थित आवास पहुंच गए। सबने एमएलसी के छोटे भाई व शहर के प्रमुख कारोबारी डॉ अरुण चन्द को भी मिठाई खिलाकर बधाई दी। सीपी चन्द ने समर्थकों का धन्यवाद दिया है। उनका कहना है कि स्थानीय निकाय से एमएलसी का चुनाव 2016 में जीता था। अब राजनीति बदल गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर सहित यूपी का तेजी से विकास कराया है। विकास की इस मुहिम को आगे बढ़ाना है। भाजपा से पुराना जुड़ाव है। संगठन व सरकार के ज्यादातर लोगों को जानते हैं। अब मिलकर संगठन को और मजबूत करेंगे।
युवा उत्साहित
एमएलसी सीपी चन्द के भाजपा में शामिल होने से युवा उत्साहित हैं। आशीष चन्द, विपुल चन्द (डिम्पल), अमरेंद्र चन्द (मनीष), इंद्रजीत सिंह व राहुल शाही, संतोष वर्मा, नवल किशोर नथानी, अनिल सिंह, देवेंद्र चन्द, रिंटू चन्द, सतीश प्रजापति, अमित सिंह, नीरज गुप्ता, आनंद द्विवेदी व मीडिया प्रभारी जेडी मिश्रा ने कहा कि सीपी चन्द ने विश्व की सबसे बड़ी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है। विश्वजीत सिंह, आनंद सिंह, नितिन जायसवाल, शुभम सिंह, विशाल सिंह, ओमकार सिंह, चंद्रभान, रणजीत सिंह, मोहन यादव, आशुतोष मौर्य, राजेश तिवारी ने भी गोलघर स्थित एमएलसी के घर जाकर जश्न मनाया।
संगठन को मिलेगी मजबूती
सीपी चन्द के भाजपा में आने से संगठन को मजबूती मिलेगी। सीपी के पिता व पूर्व मंत्री स्वर्गीय मारकंडेय चन्द 1980-2000 तक विधायक थे। वह धुरियापार विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर जीतते थे। बाद में धुरियापार विधानसभा सीट का अस्तित्व खत्म हो गया। इस क्षेत्र का कुछ हिस्सा चिल्लूपार व कुछ हिस्सा खजनी विधानभा से जुड़ गया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि एमएलसी व उनके परिवार की चिल्लूपार क्षेत्र में अच्छी पकड़ है। अगर सीपी चन्द को स्थानीय निकाय से एमएलसी का चुनाव नहीं लड़ाया गया तो वह चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के संभावित प्रत्याशी हो सकते हैं। हालांकि यह सब टिकट मिलने के बाद ही तय हो सकेगा।