श्रद्धालु आज प्रदोष व्रत रखेंगे। सोमवार को पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष कहा जाएगा। इस दिन विधि-विधान से शिव और पार्वती की आराधना की जाएगी। पौराणिक मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत करने वाले भक्तों पर हमेशा भगवान शिव कृपालु रहते हैं। भक्त का दुख व दारिद्रता दूर होती है। महादेव उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
प्रदोष व्रत का महत्व
पंडित देवेंद्र प्रताप मिश्र के अनुसार प्रदोष व्रत भगवान शिव के साथ चंद्रदेव से भी जुड़ा है। मान्यतानुसार प्रदोष का व्रत सबसे पहले चंद्रदेव ने ही किया था। माना जाता है श्राप के कारण चंद्र देव को क्षय रोग हो गया था। तब उन्होंने हर माह में आने वाली त्रयोदशी तिथि पर शिवजी को समर्पित प्रदोष व्रत रखना आरंभ किया था। जिसके शुभ फल से उन्हें रोग से मुक्ति मिली।
ऐसे करें पूजन
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद मंदिर या घर के पूजागृह में जल और पुष्प लेकर सोम प्रदोष व्रत व पूजन का संकल्प लें। फिर शिव और पार्वती की आराधना करें। दिनभर व्रत रहते हुए मन ही मन भगवान शिव के मंत्र का जाप करते रहें। शाम को प्रदोष काल मुहूर्त में पुन: स्नान कर पूजा स्थल पर भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें। अब भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें। फिर उनको धूप, अक्षत, पुष्प, धतूरा, फल, चंदन, गाय का दूध, भांग, धतूरा आदि अर्पित करें। इसके बाद भगवान को भोग लगाएं। इस दौरान ओम नम: शिवाय: मंत्र का जाप करते रहें। फिर शिव चालीसा के पाठ के बाद भगवान शिव की आरती करें। रात्रि जागरण के बाद अगले दिन सुबह स्नान आदि करके भगवान शिव की पूजा करें। फिर ब्राह्मण को दान देने के बाद पारण कर व्रत को पूरा करें।
पूजा का शुभ मुहूर्त - शाम 07 बजकर 10 मिनट से रात 09 बजकर 13 मिनट तक।