हार्ट के मरीजों को सांस की तकलीफ
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आसिफ शकील ने कहा कि हार्ट के पुराने मरीजों की बीमारी बढ़ जा रही है। उनका हार्ट पहले से कमजोर है, जबकि ठंड के कारण कफ बनने से छाती में भी इंफेक्शन हो रहा है। ऐसे मरीजों को गर्म पानी का भाप लेना चाहिए और स्पाइरोमीटर चलाना चाहिए ताकि सांस की तकलीफ न हो। मॉर्निंग वॉक करने वाले मरीजों को दोपहर में टहलना चाहिए।
मौसम की चपेट में आने से हुए बीमार
जिला अस्पताल सीएमएस डॉ. बीके सुमन ने कहा कि अस्पतालों में जितने मरीज इलाज कराने आ रहे हैं, उनमें 40 प्रतिशत लोग ठंड की चपेट में आने से बीमार हुए हैं। यदि छाती में दर्द के साथ सांस फूलना, चक्कर आना, मरीज बेहोशी की हालत में हो तो हार्ट अटैक हो सकता है, जबकि सुगर के मरीजों में छाती के दर्द को छोड़कर अन्य लक्षण हो तो वह मरीज गंभीर स्थिति में जा रहा है। ऐसे मरीजों को तत्काल डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।
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मेडिकल कॉलेज हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. कुणाल सिंह ने कहा कि हार्ट अटैक में सीपीआर बहुत आवश्यक कड़ाके की ठंड में हार्ट के मरीज बढ़ गए हैं। ओपीडी के 70-80 मरीजों में 8 -10 मरीज हार्ट अटैक वाले हैं। ऐसे मरीजों को तत्काल सीपीआर देकर उनकी जान बचाई जा सकती है। आम आदमी को भी सीपीआर देने का तरीका सीखना चाहिए ताकि आवश्यकता पड़ने पर मरीज की छाती को हाथों से दबाकर और मुंह में सांस देकर जान बचा सके।
इस कारण खराब हो रही तबीयत
- ब्लोअर और रूम हीटर के पास अधिक समय रहने वाले लोग बाहर निकलते हैं तो तापमान कम रहता है। इससे सेहत खराब हो जाती है।
- धुआं वाले अलाव के पास बैठने से हार्ट और सुगर के मरीजों की समस्या बढ़ जाती है।
- बीमार मरीज को अस्पताल तक ले जाने में भी ठंड लग जाती है तो तबीयत और खराब हो जाती है।
- ठंड मौसम में अपर्याप्त गर्म कपड़े पहनकर बाहर निकलने पर सेहत खराब हो रही है।