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मिशन इंद्रधनुष: पांच साल में सात बार, टीका न छूटे एक भी बार, दूसरा चरण शुरू

Tue, 05 Apr 2022 02:50 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

सीएमओ ने बताया कि नियमित टीकाकरण 12 प्रकार की बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है। टीबी, पोलियो, हेपेटाइटिस बी, डिप्थीरिया, टिटनेस, मिजिल्स, परट्यूटिस (काली खांसी), रूबेला, जेई (दिमागी बुखार), निमोनिया, वायरल डायरिया और हीमोफिलस इंफ्लुएंजा से बचाने में टीकों की भूमिका अहम है।
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मिशन इंद्रधनुष के तहत टीके की शुरूआत करते सीएमओ। - फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर जिले में पांच साल में सात बार, टीका न छूटे एक भी बार के स्लोगन के साथ मिशन इंद्रधनुष का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हो गया। महानगर के झरना टोला शहरी स्वास्थ्य केंद्र (यूपीएचसी) से सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने एक सप्ताह की बच्ची को पल्स पोलियो की ड्रॉप पिलाकर अभियान का उद्घाटन किया।

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सीएमओ ने बताया कि यह अभियान 13 अप्रैल तक चलेगा और इसमें नियमित टीकाकरण से वंचित दो वर्ष तक के बच्चों और गर्भवती के टीकाकरण पर जोर होगा। स्वास्थ्य विभाग 12 प्रकार के टीके सभी सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य उपकेंद्रों, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स, ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) पर प्रत्येक बुधवार और शनिवार को निशुल्क उपलब्ध करवाता है। जिन बच्चों और गर्भवती को टीका नहीं लग पाया है, उन्हें आशा कार्यकर्ता ढूंढ कर टीकाकरण कराएंगी।

3,878 सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें दो वर्ष तक के 19,523 बच्चों को टीका लगेगा। इसी प्रकार 6,072 गर्भवती का टीकाकरण भी किया जाएगा। इस अभियान का पहला चरण पिछले माह सात मार्च से पंद्रह मार्च तक चला था। इसमें दो वर्ष से कम उम्र के 20,047 बच्चों और 5,308 गर्भवतियों का टीकाकरण किया गया था। इस मौके पर जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एएन प्रसाद, जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. एके चौधरी, डब्ल्यूएचओ के एसएमओ डॉ. संदीप पाटिल, यूनिसेफ के रीजनल कोऑर्डिनेटर संदीप श्रीवास्तव, डीएमसी नीलम यादव, यूएनडीपी के प्रतिनिधि राजीव रंजन, पवन सिंह और सीएचएआई संस्था से दिलीप गोविंद राव आदि मौजूद रहे।
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12 बीमारियों से बचाता है टीका

सीएमओ ने बताया कि नियमित टीकाकरण 12 प्रकार की बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है। टीबी, पोलियो, हेपेटाइटिस बी, डिप्थीरिया, टिटनेस, मिजिल्स, परट्यूटिस (काली खांसी), रूबेला, जेई (दिमागी बुखार), निमोनिया, वायरल डायरिया और हीमोफिलस इंफ्लुएंजा से बचाने में टीकों की भूमिका अहम है। निजी अस्पतालों में इन बीमारियों से बचाव के लिए महंगे दामों पर टीके लगवाने पड़ते हैं। वहीं, सरकारी अस्पतालों में यह टीके पूरी तरह से निशुल्क हैं।

ये निशुल्क टीके हैं आवश्यक

  • बच्चे के जन्म पर बीसीजी, हेपेटाइटिस बी एवं पोलियो की जीरो डोज लगेगी।
  • बच्चे के डेढ़ महीने के होने पर पेंटावैलेट एक, ओपीवी एक, एफआईवीपी एक, रोटा एक एवं पीसीवी एक लगेगा।
  • बच्चे के ढाई महीने के होने पर पेंटावेलेट दो, ओपीवी दो और रोटा दो लगेगा।
  • बच्चे के साढ़े तीन महीने के होने पर पेंटावेलेट तीन, ओपीवी तीन, एफआईपीवी दो, रोटा तीन एवं पीसीवी दो लगेगा।
  • बच्चे को नौ से बारह महीने की उम्र में एमआर एवं जेई पहला टीका, पीसीवी और विटामिन ए देंगे।
  • 16 से 24 माह की उम्र में बच्चे को एमआर, जेई, डीपीटी, ओपीवी और विटामिन ए हर छह माह पर पांच साल तक देंगे।
  • बच्चे को पांच से छह साल की उम्र में डीपीटी दो लगेगा।
  • बच्चे को 10 साल की उम्र में टीडी का टीका लगेगा।
  • बच्चे को 16 साल की उम्र में टीडी।
  • गर्भवती को टीडी का टीका लगता है।
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