आरपीएफ की उप निरीक्षक दीपिका यादव की सतर्कता और संवेदनशीलता को मिलन और उसकी पत्नी आजीवन भूल नहीं पाएंगे। दीपिका ने ट्रेन में बिछड़े उनके चार बच्चों को न सिर्फ हिफाजत से अपने पास रखा बल्कि उन्हें दूध और खाना भी खिलाया। बाद में खोजते हुए पहुंचे दंपती के हवाले बच्चों को कर दिया गया। बच्चों से लिपटी मां की आंखों से आंसू की धारा निकल पड़ी, हालांकि यह आंसू खुशी के थे।
दरअसल, कटिहार स्पेशल से मुजफ्फरपुर तक चार बच्चों और पत्नी के साथ सफर कर रहे मिलन डोमिनगढ़ स्टेशन पर अपने बच्चों से बिछड़ गए। मिलन अपनी पत्नी के साथ डोमिनगढ़ स्टेशन पर पीने के लिए पानी लेने उतरे थे कि ट्रेन गोरखपुर की तरफ रवाना हो गई। गोरखपुर जंक्शन पर कोच नंबर एस-8 में रो रहे बच्चों पर आरपीएफ की उप निरीक्षक दीपिका यादव की नजर पड़ गई।
बच्चों को रोते देख दीपिका चारों बच्चों को आरपीएफ पोस्ट ले आईं। उन चारों में सबसे बड़ी आठ साल की बच्ची ने पूरी बात बताई। बच्चों को रोता देख आरपीएफ जवानों ने पहले तो उन बच्चों के लिए दूध का इंतजाम किया फिर उन्हें खाना खिलाया। इस दौरान एक महिला बच्चों को खोजते हुए गोरखपुर पोस्ट पर पहुंच गई।
मां को देख चारों बच्चों रोने लगे और जाकर लिपट गए। आरपीएफ इंस्पेक्टर राजेश सिन्हा ने बताया कि पहचान की औपचारिकताएं पूरी कराकर बच्चों को मां के सुपुर्द कर दिया। दंपती ने आरपीएफ स्टॉफ के प्रति आभार जताया और हाथ जोड़कर कहा कि आपके भरोसे ही हमारे चारों बच्चे सुरक्षित हैं।