गोरखपुर जिले में रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी ) पूर्वांचल में 10 सालों से लग रही वैक्सीन का अध्ययन करेगा। कोरोना से लेकर जेई, रोटा वायरस, स्क्रब टाइफस, निमोनिया जैसे वैक्सीन का प्रभाव बच्चों पर क्या पड़ रहा है, इसे जानेगा। सेंटर, वायरस के बदलते प्रारूपों पर भी गहन शोध करेगा। नए वैक्सीन की क्षमता और उसके प्रभाव की जानकारी हासिल करने के लिए आरएमआरसी की बायोसेफ्टी लेवल-टू प्लस की नौ लैब बनकर तैयार हो चुकी है।
जानकारी के मुताबिक आरएमआरसी के पास अभी तक बायोसेफ्टी लेवल-टू के लैब नहीं थे। जो नौ लैब बनाए गये हैं ,इसमें इम्युनोलॉजी से लेकर एनिमल फैसल्टी के लैब शामिल हैं। आरएमआरसी के सीनियर वैज्ञानिक व मीडिया प्रभारी डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि लैब लगभग तैयार हो चुकी है। इस माह के अंत तक कार्यदायी संस्था लैब को हैंडओवर कर देगी। इसके बाद लैब में टीकों के अध्ययन पर काम शुरू हो जाएगा।
एनिमल फैसल्टी में रखे जाएंगे चूहे, खरगोश और बंदर
डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि लैब में एनिमल फैसल्टी भी तैयार है। इसमें चूहे, खरगोश, बंदर, गिनीपिग जैसे जानवर शुरुआती दिनों में रखे जाएंगे। इस काम में हैदराबाद की एक बड़ी लैब की मदद ली जाएगी। इन जानवरों के रख-रखाव से लेकर उनके प्रजनन तक की जिम्मेदारी भी आरएमआरसी के हाथों में होगी।
यह लैब बनकर हो गई हैं तैयार
इम्यूनोलाजी की लैब बनकर तैयार हो गई है। इसमें वैक्सीन की प्रतिरोधक क्षमता तथा उसके प्रभाव पर शोध होंगे। साथ ही नई वैक्सीन के प्रभाव का भी अध्ययन होगा। इसके अलावा मॉलीक्यूलर बायोलाजी के लैब में जीनोम सिक्वेंसिंग की जा सकेगी। यह मशीन दो माह के अंदर दिल्ली से आएगी। इसके बाद से पूर्वांचल में वाराणसी के बाद से गोरखपुर में भी जीनोम सीक्वेसिंग की जांच हो सकेगी। मेडिकल इंटोमोलॉजी की लैब में डेंगू, चिकनगुनिया, इंसेफेलाइटिस जैसे वायरस पर शोध होगा, जिससे बीमारियों का पता चल सके और उसके इलाज के तरीकों की सही जानकारी हो सके।
नॉन कम्युनिकेशन डिजीज के इस लैब में शुगर और हाइपरटेंशन की जांच की जाएगी। माइक्रोबायोलॉजी के लैब में वायरस पर शोध होगा। सोशल बिहैवियर स्टडी लैब में मस्ष्तिक पर पड़ने वाले बीमारी पर शोध किया जाएगा। हेल्थ कम्युनिकेशन लैब और इंटरनेशल लैब में बीमारियों की रोकथाम और नई बीमारियों के बारे में पता लगाया जाएगा।
एंटी फंगल पर होगा शोध
पूर्वांचल में पहली बार माइकोलाजी लैब आरएमआरसी में तैयार किया जा रहा है। इस लैब में फंगल की जांच की जाएगी। इसमें एंटी फंगल से लेकर ब्लैक, एलो और व्हाइट फंगस आदि शामिल किए गए हैं। शोध में उसके उपचार और रोकथाम की जानकारी इकट्ठा की जाएगी, जिससे कि पूर्वांचल में फंगस को रोका जा सके।
आरएमआरसी की बीएसएल टू प्लस लैब लगभग तैयार हो चुकी है। इसमें नौ तरह के लैब बनाए गए हैं। इसमें आरएमआरसी वैक्सीन के प्रभाव और उसकी क्षमता का अध्ययन कर सकेगा। इसके अलावा नए वैक्सीन के प्रभावों को भी जानने की कोशिश होगी। इतना ही नहीं फंगस के बारे में भी लैब में शोध हो सकेगा। जल्द ही बीएसएल थ्री लैब भी बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद शोध का दायरा और बढ़ सकेगा।
डॉ. रजनीकांत, निदेशक, आरएमआरसी