आरबीआई ने जांच दौरान पाया है कि लोन के वितरण में लंबे समय से गड़बड़ी की जा रही है। बैंक के सचिव अजय सिंह ने भी नियम के अनुसार लोन नहीं लिया है। 10 मई 2023 को आरबीआई की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है कि 23 जून 1996 को अजय सिंह ने 2.77 लाख रुपये, 22 आरबीआई ने जांच के दौरान अगस्त 2019 को 15 लाख रुपये और 28 जनवरी को 15.50 का रुपये का ऋण लिया था। 33 लाख रुपये से अधिक के इस ऋण पर बज बहुत ज्यादा हो गया है। मूलधन और ब्याज जोड़कर धनराशि बहुत ज्यादा हो गई है।
आरबीआई सूत्रों के मुताबिक, पहले तो नियम विरुद्ध ऋण लिया और उसे जमा करने में भी नियमों का पालन नहीं किया गया। आरबीआई ने जब इसकी जांच
तो पता चला कि सचिव पद पर रहते हुए अजय सिंह ने ऋण स्टॉफ लोन ले लिया था। नियम के मुताबिक, सचिव के वेतन के एक अनुपात में ही लोन स्वीकृत होता है। लेकिन सचिव ने नियमों को ताक पर रखकर लोन स्वीकृत करा लिया।
आरबीआई ने बैंक की माली हालत और उसके बाद भी बैंक से लिए ऋण पर नाराजगी जताते हुए सचिव को इस धनराशि को जमा करने का निर्देश दिया है। सूत्रों की मानें तो आरबीआई की सख्ती और जांच कर कार्रवाई के निर्देश पर सचिव ने दो दिन पहलने 10 लाख रुपये जमा कर दिए हैं।
नगर सहकारी बैंक सचिव अजय सिंह ने कहा कि आरबीआई, सभी बैंकों के साथ रिकवरी की एक प्रक्रिया करती है। नगर सहकारी बैंक के साथ भी इसी प्रक्रिया के तहत लोन को जमा करवाने के लिए पत्राचार किया गया है। हमने जो लोन लिया था, उसमें काफी रकम जमा करवा दी गई है। बाकी को जल्द जमा कराकर देनदारी खत्म करा देंगे। बैंक से एनपीए खातों के बकाए के लिए प्रतिमाह की दर से एक धनराशि जमा करवाई जा रही है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया - (आरबीआई) ने कहा कि बैंक की तरफ से एनपीए खातों के बकाए को लेकर दिशा-निर्देश दिया गया है। इसके लिए सीमित समय सीमा दी गई है। बैंक के किसी खाताधारक को परेशानी ना हो, आरबीआई का यही प्रयास है। सचिव की तरफ से बैंक से ही लिए गए लोन पर भी उन्हें तय समय से भीतर इस धनराशि को जमा करने का लिए प्रबंधन को निर्देशित किया गया था। लिए गए ऋण को समय पर जमा नहीं किया तो आरबीआई नियमानुसार कार्रवाई के लिए निर्देशित करेगी।