व्यासपीठ की पूजा करने व आरती उतारने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कथा सबसे पहले इसी उत्तर प्रदेश की भूमि नैमिषारण्य में सुनाई गई थी। इस कथा को लोग सुनते हैं और जानते हैं कि यह हमारे पूर्वजों की कथा है। यह हमारी संस्कृति की कथा है। इसमें भगवान की लीला का वर्णन है। उन्होंने कहा कि अपने जीवन के दायित्व के साथ-साथ धर्म का आचरण करना और प्रभु की लीला का श्रवण करना चाहिए। क्योंकि कहा गया है, जहां धर्म होता है, वहीं विजय भी होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले की सरकारों ने सनातन धर्म की उपेक्षा की तथा कथा को काल्पनिक बताया। पर, वर्तमान सरकार बनाने के बाद आज धार्मिक स्थलों का पुनुरुद्धार हो रहा है जो 19 47 में ही हो जाना चाहिए था।
मुख्यमंत्री के संबोधन के उपरांत श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का रसपान व्यासपीठ पर विराजमान कथा व्यास वृंदावन मथुरा से पधारे भागवत भास्कर कृष्णचंद्र शास्त्री 'ठाकुर जी' ने कराया। कथा प्रतिदिन अपराह्न 3 बजे से शाम 6 बजे तक सुनाई जाएगी। इसका विराम हवन एवं भंडारे के साथ 2 अक्टूबर को होगा। श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के शुभारंभ से पूर्व गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में मुख्य मंदिर से कथा स्थल तक बैंडबाजे, शंख ध्वनि की गूंज तथा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा के कथा स्थल पहुंचने पर गोरक्षपीठाधीश्वर ने अखंड ज्योति स्थापित की। इस अवसर पर महंत सुरेश दास, राघवाचार्य, अवधेश दास, दासलाल जी, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, संतोष दास आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।