बैठक करते कमिश्नर, डीएम व जीडीए सचिव।
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गोरखपुर के रामगढ़ताल क्षेत्र में मानचित्र स्वीकृत कराने के दौरान ग्रीन सेस (हरित अधिभार) वसूले जाने की गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की तैयारी पर फिलहाल के लिए ब्रेक लग गया है। हरित अधिभार के आकलन के लिए प्राधिकरण द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट जीडीए अध्यक्ष व कमिश्नर को भेजी जाएगी। कमिश्नर अध्ययन करने के बाद ही तय करेंगे कि सेस लगाया जाए या नहीं। यह फैसला शुक्रवार को जीडीए बोर्ड बैठक में लिया गया।
प्राधिकरण के अध्यक्ष व कमिश्नर रवि कुमार एनजी की अध्यक्षता में शाम 4.30 बजे से करीब तीन घंटे तक चली बैठक में 19 एजेंडों पर चर्चा की गई। इस दौरान रामगढ़ताल स्थित प्रेक्षागृह के संचालन को लेकर तय हुआ कि वहां की साफ-सफाई के लिए ई-टेंडरिंग के जरिए एजेंसी तय की जाए। जबकि प्रेक्षागृह की बुकिंग और उसके बिजली बिल का काम खुद प्राधिकरण करेगा।
संचालन को लेकर जीडीए ने 96 लाख रुपये का इस्टीमेट तैयार किया था। इसपर मंथन के दौरान बोर्ड ने यह तय किया कि कौन सा काम एजेंसी करेगी और कौन खुद प्राधिकरण। वहीं एकीकृत मंडलीय कार्यालय के लिए अभी शासन से धन नहीं मिलने की वजह से काम प्रभावित होता देख बोर्ड ने निर्णय किया कि प्राधिकरण 50 लाख रुपये अपने पास से देगा।
शासन की तरफ से जब इस मद में धन आएगा तो इस रकम का समायोजन कर लिया जाएगा। बोर्ड बैठक में मानबेला काश्तकारों को मुआवजे की बढ़ी हुई रकम दिए जाने को लेकर जनपद न्यायाधीश न्यायालय 24 दिसंबर को हुए आदेश पर भी चर्चा हुई।
बोर्ड को बताया गया कि न्यायालय ने 69 काश्तकारों के मामले में मुआवजे के तीन करोड़ 60 लाख 83 हजार 711 रुपये जमा करने का अदेश दिया था। न्यायालय मुआवजे का वितरण खुद करेगा। आदेश पर अमल करते हुए 30 जून को यह रकम न्यायालय में जमा करा दी गई है।