अपनी जमीन की खतौनी ठीक कराने और कब्जा पाने के लिए वर्षों से दौड़भाग करने वाले खुटभार के साधु शरण विश्वकर्मा (65) को मौत के बाद भी न्याय नहीं मिलने पर परिजनों ने मुख्यमंत्री से आस जताई है। नातिन नेहा ने कहा कि अब मुख्यमंत्री से ही आस है और जनता दरबार में जाकर शिकायत करेंगे, ताकि इंसाफ मिल सके। ऐसे में पीड़ित परिवार को अब सिर्फ मुख्यमंत्री से ही उम्मीद है।
जानकारी के मुताबिक, 17 जुलाई को संपूर्ण समधान दिवस के दिन खजनी तहसील अपनी फरियाद लेकर साधु शरण गए थे। यहां इंसाफ पाने की चाह में लाइन में लगे साधु शरण की मौत हो गई थी। पहले तो प्रशासनिक अफसरों ने मौत पर ही पर्दा डालने की कोशिश की, लेकिन मामले के तूल पकड़ने पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
इसके बाद एसडीएम खजनी पवन कुमार, सीओ खजनी इंदु प्रभा सिंह भी साधु शरण के घर पहुंच गई थी। अफसरों ने इंसाफ दिलाने का वादा किया था, लेकिन अभी तक इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिस पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने वादा किया था, उनसे परिजनों को कोई मदद नहीं मिल पाई।
अभी तक न ही खतौनी दुरुस्त हो पाई है और न ही दर्ज केस में आरोपियों पर कोई कार्रवाई हुई। पुलिस ने दबाव में कटघर के राम प्रताप सिंह और खुटभार के अयोध्या मद्देशिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने, धमकी देने के धारा में आरोपित बनाया था, मगर आज तक इसके आगे की कार्रवाई नहीं हो सकी है।
यह था मामला
साधु शरण के पास 34 डिस्मिल जमीन थी। इसमें से 11 डिस्मिल जमीन वर्ष 2014 में बेच दी थी। जमीन का कुछ हिस्सा भले बेचा था, लेकिन खतौनी से साधु शरण का नाम ही कट गया था। इसी बीच साधु शरण ने 2016 में एक कारोबारी से जमीन का सौदा तय किया था। एग्रीमेंट भी हो गया। मृत बुजुर्ग की पुत्र वधु व पोती ज्योति के मुताबिक जमीन का एग्रीमेंट हुआ, लेकिन रुपये का भुगतान नहीं किया गया। जमीन का सौदा तय करने वालों ने साधु शरण को कानूनी दांव पेंच में उलझा दिया। इसी जमीन को दुरुस्त कराने के लिए साधु शरण तहसील का चक्कर काट रहे थे।