रुस्तमपुर के अष्टभुजा दूबे ने बताया कि उनका बेटा गाजियाबाद में बीटेक की पढ़ाई करता है। दिवाली पर उसे घर आना है, लेकिन ट्रेन में लंबी वेटिंग के कारण उसे प्राइवेट बस का टिकट 4200 रुपये में खरीदना पड़ा। ट्रेनों की तरह प्राइवेट बसों का भी किराया फिक्स होना चाहिए।
केस 2
बशारतपुर के रहने वाले अनिल दिल्ली में रहकर प्राइवेट नौकरी करते हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें आने की तो ट्रेन की टिकट मिल गई है, लेकिन जाने के लिए लंबी वेटिंग है। जाने के लिए जब प्राइवेट बस के टिकट बुक करनी चाही तो देखा कि दिल्ली का टिकट 4400 रुपये का मिल रहा है।
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केस 3
विष्णुपुरम के रहने वाले दीपक मिश्रा ने बताया कि उन्हें ऑफिस की मीटिंग के लिए 20 नवंबर को दिल्ली जाना है, लेकिन ट्रेन की टिकट नहीं मिल रही थी, तो प्राइवेट बस की टिकट बुक कराया हूं, जो 3900 रुपये की पड़ी है। किराया बहुत ज्यादा है, लेकिन मजबूरी है तो टिकट बुक कराना ही पड़ा।