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पिपराइच के हरखापुर गांव का हाल: हर शख्स के जेहन में भय... युवा फिर तबाही की राह पर न बढ़ जाएं

Sat, 15 Apr 2023 11:28 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।

सार

सोमवार को गांव के पटेल चौराहा पर ही गोली चली थी। वहां से करीब सौ कदम दूर स्थित अपने मकान में बुजुर्ग करमचंद (70) गुमसुम बैठे उधर से गुजर रहे पुलिस-पीएसी के जवानों को एकटक निहार रहे थे। उनके आगे जाने के बाद बुजुर्ग ने गहरी सांस ली।
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पिपराइच क्षेत्र के हरखापुर गांव के इसी मंदिर पर हो रहा था कीर्तन। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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दिन शुक्रवार, समय दोपहर करीब 1:30 बजे, गोरखपुर के स्थान पिपराइच का हरखापुर गांव। हर तरफ अजीब सी खामोशी। बूटों की आवाज से कुछ देर के लिए जब खामोशी टूटती थी, तब लोग थोड़ी राहत महसूस करते थे। गांव भर की चिंता यही है कि खूनखराबे के लिए पहचाना जाने वाला यह इलाका फिर से उसी राह पर न चल पड़े। बड़ी मुश्किल से संभल रहे युवा फिर अपराध-गैंगवार के रास्ते पर चलकर तबाह न हो जाएं।

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यहां 10 अप्रैल को हुए जुगनू हत्याकांड में आरोपी बने पवन राजभर के घर से सौ कदम दूर पेड़ के नीचे सच्चिदानंद, रवि, गुनेश्वर त्रिपाठी और मदन त्रिपाठी बैठे थे। कुछ लोग अगल-बगल खड़े होकर शुक्रवार सुबह तेजस्वी पटेल और पवन राजभर के पुलिस मुठभेड़ में पकड़े जाने की चर्चा कर रहे थे। इसी बीच कुछ लोग बोल पड़े, अगर जातीय संघर्ष नहीं रुका तो भविष्य में खूनखराबा बढ़ सकता है।

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सच्चिदानंद ने गुनेश्वर से कहा कि चाचा, पुलिस ने अच्छा किया। कम से कम यह तो हुआ कि गोली चलाने वालों को भी गोली लगने का अहसास हुआ। तभी गुनेश्वर बोल उठे कि उनको तो और कड़ा दंड देना चाहिए था। वह सब जेल से छूटकर आएंगे तो फिर गोली चलेगी। पुलिस हर बार लापरवाही करती है। पहले ही पुलिस सख्त हुई होती तो ऐसी नौबत नहीं आती। तभी पिपराइच थाना के दीवान शिव प्रकाश सिंह, सिपाही उपेंद्र गौंड़ पीएसी जवानों के साथ गश्त करते हुए पहुंच गए। वर्दी वालों को देखकर लोग खड़े हो गए। दीवान ने पूछा कि कोई दिक्कत तो नहीं है। लोगों ने कहा नहीं। सब ठीक है साहब। यह सुनकर पुलिस टीम आगे बढ़ गई।
 

हरखापुर गांव में सोमवार को जुगनू पांडेय, विश्वास तिवारी और मोनू को उस समय गोली मारी गई थी, जब वह आपस में खड़े होकर बात कर रहे थे। इसमें जुगनू पांडेय की गोली से मौत हो गई थी। जबकि उनके दो अन्य साथी घायल हो गए थे। इसके बाद से गांव में पुलिस और पीएसी तैनात है।

वर्दी की मौजूदगी के बावजूद लोगों के भीतर घटना को लेकर दहशत बनी हुई है। हर कोई यही चाहता है कि इस जातीय संघर्ष पर पूर्ण विराम लगे। सबकी चिंता है कि जेल गए अभियुक्तों के छूटने के बाद फिर से गोलीबारी न हो। गांव की युवा पीढ़ी बरबाद होने से बचे और कमाई-धमाई करे।

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गांव की खुशियों को लग गई किसी की नजर
सोमवार को गांव के पटेल चौराहा पर ही गोली चली थी। वहां से करीब सौ कदम दूर स्थित अपने मकान में बुजुर्ग करमचंद (70) गुमसुम बैठे उधर से गुजर रहे पुलिस-पीएसी के जवानों को एकटक निहार रहे थे। उनके आगे जाने के बाद बुजुर्ग ने गहरी सांस ली। फिर बोले, गांव की खुशियों को ना जाने किसकी नजर लग गई। सब लोग हंसी खुशी रहते थे, लेकिन अब ना जाने क्या हो रहा है, यदि आगे भी ऐसा चलता रहा तो बच्चों और युवाओं के भविष्य का क्या होगा। यह चिंता अकेले करमचंद को नहीं, बल्कि गांव के हर किसी को सता रही है।

गोली कांड के अभियुक्त पवन राजभर के घर से थोड़ी ही दूरी पर सविता देवी का मकान है। उनके दरवाजे पर कुंडी पर लगी हुई थी। घर के सामने पंपिंग सेट गिरा पड़ा था। वहीं नजदीक के एक मंदिर के पास बगल में रहने वाली सविता देवी कुछ महिलाओं के साथ गेहूं फटकते हुए बात कर रही थीं।

पुलिस को देखकर चुप हो गईं। पुलिस वालों के जाने के बाद उनको जब कुरेदा गया तो वह बोलीं। पवन चार भाइयों में सबसे छोटा है। उसके तीन भाई अभय, वासुदेव और हरिओम बाहर (मुंबई ) में रहकर कमाते हैं। यह चला गया होता तो कम से कम यह नौबत तो नहीं आती।

गांव के विश्राम तिवारी और आरसी पटेल उसी चौराहे पर मिले, जहां गोली चली थी। विश्राम ने बताया कि इस चौराहे से गुजरने से पर डर लगने लगा है। हम लोगों ने कभी नहीं सोचा था कि पुलिस रिकार्ड में यह खूनी चौराहा हो जाएगा। इसका हम लोगों को काफी अफसोस है कि गांव में यह घटना हो गई।

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गांव के आरसी पटेल को भी इस बात की चिंता थी कि अब आगे चलकर क्या होगा। यह अदावत खत्म नहीं हुई तो काफी दिक्कत होगी। कुल मिलाकर गांव के लोगों के जेहन में बस यही बात थी कि अब यह सब खत्म हो जाना चाहिए।

ग्रामीण करमचंद ने कहा कि हमारे गांव में सब लोग काफी मिलजुलकर रहते थे। ना जाने किसने इन युवकों को भटका दिया जो इस राह पर चल पड़े हैं। जो कुछ भी हुआ है। वह भविष्य के लिए ठीक नहीं है।
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ग्रामीण विश्राम तिवारी ने कहा कि गांव के युवकों के बीच वर्चस्व की लड़ाई हो रही है। किसी न किसी बहाने इसे तूल दिया जा रहा है। इस घटना में शामिल हर किसी के खिलाफ सख्ती होनी चाहिए। साथ ही यह भी होना चाहिए कि गांव में कभी ऐसी घटना न हो।

ग्रामीण आरसी पटेल ने कहा कि गोली चलने के बाद से गांव में दहशत है। आपस की रंजिश बढ़ती जा रही है। दो जातियों के बीच इसे बढ़ावा देने के बजाय खत्म करने की कोशिश की जानी चाहिए। पुलिस प्रशासन को चाहिए कि इसकी पहल करे।



ग्रामीण सविता ने कहा कि जो लड़के बाहर रहकर रोजीरोटी कमा रहे हैं। उनको इससे क्या मतलब है। गांव में पीएसी लगी है। हम लोगों के रिश्तेदार रोजाना फोन करके पूछ रहे हैं। रोज-रोज क्या बताया जाए।

ग्रामीण गुनेश्वर त्रिपाठी ने कहा कि जिन युवकों ने यह हरकत की है। उन्हें कड़ा दंड मिलना चाहिए। पुलिस को चाहिए कि ऐसी कार्रवाई करे जो नजीर बनें। ताकि गांव में इस तरह की हरकत करने का कोई दुस्साहस न कर सके।

गांव की मिश्रित आबादी में ब्राह्मण बहुलता
हरखापुर के लोगों ने बताया कि गांव की मिश्रित आबादी में ब्राह्मण बहुलता है। करीब 2,600 आबादी वाले गांव में कुल 1,600 वोट हैं। यह गांव अब नगर पंचायत पिपराइच में शामिल हो चुका है। गांव में नौकरीपेशा लोग भी हैं। ग्रामीणों के मुताबिक राजनीतिक वर्चस्व बढ़ाने की कोशिश में पिछले पंचायत चुनाव से टशन बढ़ी है। आरोपी रामपाल अपना राजनीतिक कद बढ़ाने के लिए युवाओं की टोली बनाने लगा। रसूख वाले एक राजनेता से जुड़ने के बाद वह लगातार अपना वर्चस्व बढ़ाने लगा। यह बात गांव के एक वर्ग को नागवार गुजरने लगी।
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