गोरखपुर में सुई से नशा करने वालों को संक्रमण से बचाने के लिए जिले के 100 शैय्या टीबी अस्पताल में ओपिऑयड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (ओएसटी) केंद्र शुरू कर दिया गया है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्र और अस्पताल के अधीक्षक डॉ. एके वर्मा ने शुक्रवार को इसका उद्घाटन किया है। अब तक यह सुविधा सिर्फ बीआरडी मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध थी।
जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि इस केंद्र से कुशीनगर और गोरखपुर के दक्षिणी भाग के रहने वाले उन लोगों को दवा और परामर्श मिल सकेगा जो काफी दूरी तय करके मेडिकल कॉलेज जाते थे। सुई से नशा करने वालों में एड्स संक्रमण का खतरा बना रहता है। ऐसे लोगों के परामर्श व इलाज की सुविधा अब तक सिर्फ मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध थी।
अब टीबी अस्पताल में एक स्टॉफ नर्स को इस कार्य के लिए तैनात किया गया है। डॉ. मिश्र ने बताया कि सुई से नशा करने वालों में न केवल एड्स संक्रमण का खतरा होता है, बल्कि हेपेटाइटिस सी और शारीरिक क्षति की आशंका भी बनी रहती है। ऐसे लोगों का इलाज राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत होता है।
जिले में ऐसे 100 से अधिक सुई से नशा करने वाले लोग हैं जो सिर्फ मेडिकल कॉलेज से इलाज की सुविधा प्राप्त कर रहे थे। अब इन लोगों को नियमित तौर पर ओएसटी के माध्यम से निशुल्क दवा उपलब्ध कराई जाएगी। मौके पर चिकित्सा अधिकारी डॉ. एएन त्रिगुट, डॉ. एसके द्विवेद्वी, जिला क्षय रोग कार्यालय से एएन मिश्र, धर्मवीर प्रताप सिंह, परामर्शदाता माधुरी तिवारी, कर्मचारी ज्ञानेंद्र, प्रोजेक्ट मैनेजर कुंदन कुमार सिंह और यूपी एड्स कंट्रोल सोसाइटी व टेक्निकल सपोर्ट यूनिट के प्रतिनिधि विश्वंभर मिश्र मौजूद रहे।