राजकीय आईटीआई की मासिक फीस अभी 40 रुपये है। निजीकरण के बाद फीस 480 रुपये सालाना से बढ़कर 26 हजार रुपये तक हो जाएगी। यानी 54 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। डिप्टी डायरेक्टर (ट्रेनिंग) सुनील श्रीवास्तव ने बताया कि प्रशिक्षुओं को हाईटेक प्रशिक्षण देकर देश की प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी करने के लिए तैयार किया जा सकेगा। इसलिए फीस की बजाय सुविधाओं पर ध्यान देने की जरूरत है।
आईटीआई जेडी राजेश राम ने कहा कि शासन स्तर से पहले चरण में पूूरे प्रदेश से 16 राजकीय आईटीआई संस्थानों का चयन प्राइवेट के रूप में किए जाने का निर्णय लिया गया है। इनमें दो राजकीय आईटीआई गोरखपुर तो एक कुशीनगर में है। अभी तक हुई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी गई है।