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अब गोरखपुर मंडल के तीन सरकारी आईटीआई कॉलेज का होगा निजीकरण, जानिए क्या है वजह

Thu, 20 Aug 2020 09:34 AM IST
vivek shukla विवेक सिंह, गोरखपुर।
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आईटीआई चरगांवा - फोटो : Social media
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आईटीआई के प्रशिक्षुओं को अत्याधुनिक मशीनों से प्रशिक्षित करने और शिक्षा व प्रैक्टिकल के स्तर में व्यापक सुधार करने के मकसद से शासन की ओर से नई पहल की गई है। इसके तहत गोरखपुर मंडल के तीन सरकारी आईटीआई को निजी संस्थाओं को सौंपा जाएगा। इनमें गोरखपुर के दो और कुशीनगर जिले की एक आईटीआई शामिल है।

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शासन ने कुल 16 राजकीय आईटीआई संस्थानों को प्राइवेट संस्थानों से संचालित कराने का फैसला किया है। इनमें राजकीय आईटीआई भटहट और रामपति यादव राजकीय आईटीआई जंगल कौड़िया गोरखपुर में हैं, वहीं राजकीय आईटीआई कसया कुशीनगर में स्थित है।

यहां 12-12 ट्रेड के मुताबिक 720 सीटें मौजूद हैं। अगले सत्र से प्राइवेट संस्थाओं की ओर से शिक्षण कार्य शुरू किया जाएगा। शासन की ओर से तीनों ही नए राजकीय भवनों के निर्माण कार्य को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रदेश में 307 राजकीय, 12 महिला और 2931 निजी आईटीआई हैं।
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विभाग के अधिकारियों का कहना है कि निजी हाथों में जाने के बाद शिक्षा व प्रैक्टिकल के स्तर में सुधार होगा। हालांकि, सभी आईटीआई का पाठ्यक्रम एक ही रहेगा। इसके तहत पहले चरण में 16 और दूसरे चरण में 24 राजकीय संस्थानों को निजी हाथों में सौंपा जाना है।

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54 फीसदी फीस में होगी बढ़ोत्तरी

राजकीय आईटीआई की मासिक फीस अभी 40 रुपये है। निजीकरण के बाद फीस 480 रुपये सालाना से बढ़कर 26 हजार रुपये तक हो जाएगी। यानी 54 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। डिप्टी डायरेक्टर (ट्रेनिंग) सुनील श्रीवास्तव ने बताया कि प्रशिक्षुओं को हाईटेक प्रशिक्षण देकर देश की प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी करने के लिए तैयार किया जा सकेगा। इसलिए फीस की बजाय सुविधाओं पर ध्यान देने की जरूरत है।

आईटीआई जेडी राजेश राम ने कहा कि शासन स्तर से पहले चरण में पूूरे प्रदेश से 16 राजकीय आईटीआई संस्थानों का चयन प्राइवेट के रूप में किए जाने का निर्णय लिया गया है। इनमें दो राजकीय आईटीआई गोरखपुर तो एक कुशीनगर में है। अभी तक हुई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी गई है।
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