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गोरखपुर: अब पहले आओ, पहले पाओ की तर्ज पर फ्लॉप संपत्ति बेचेगा जीडीए

Tue, 26 Oct 2021 12:41 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

जीडीए टॉवर की दुकानों-ब्लॉक समेत 100 से अधिक संपत्तियां घोषित हो चुकी है अलोकप्रिय, लखनऊ विकास प्राधिकरण में लागू इस व्यवस्था को जीडीए में भी लागू करने पर बनी सहमति।
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गोरखपुर विकास प्राधिकरण - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर में लंबे समय से नहीं बिक रहीं अपनी अलोकप्रिय (फ्लॉप) संपत्तियों को गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) अब पहले आओ-पहले पाओ की तर्ज पर बेचेगा। पहले लॉटरी और बोली के जरिए इसकी बिक्री की जा रही थी। इन संपत्तियों को खरीदने वालों को जीडीए कुछ और सहूलियतें भी देगा।

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गोलघर स्थित जीडीए टॉवर की तीसरे तल से लेकर छठें तल तक की दुकानों- दफ्तर ब्लॉक समेत 100 से अधिक संपत्तियों को प्राधिकरण अलोकप्रिय घोषित कर चुका है। बार-बार विज्ञापन निकालने के बाद भी इनके खरीदार नहीं मिल रहे हैं। इससे जीडीए ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में लागू ‘पहले आओ पहले पाओ’ की व्यवस्था को यहां भी लागू करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया था। हाल ही संपन्न जीडीए बोर्ड ने इस प्रस्ताव को अनुमति दे दी।
 
नई व्यवस्था में इस तरह की सभी संपत्तियां ऑनलाइन अपलोड होंगी। साफ्टवेयर कुछ इस तरह से तैयार होगा कि जो संपत्ति पसंद आएगी, उसपर क्लिक कर कोई भी आवेदन कर सकेगा। इसके बाद ऑनलाइन ही भुगतान कर आवंटन पत्र भी प्राप्त कर सकेगा। वर्तमान व्यवस्था के तहत जीडीए की ओर से संपत्तियों के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। आवेदन आने पर उसकी लाटरी की जाती है और उसी आधार पर संपत्ति का आवंटन होता है।
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अलोकप्रिय संपत्तियों की नहीं बढ़ती हर साल कीमत

जिन संपत्तियों को कई बार आवेदन निकालने के बाद भी खरीदार नहीं मिलते हैं, उन्हें प्राधिकरण अलोकप्रिय घोषित कर सकता है। जीडीए में हर साल एक अप्रैल से सभी संपत्तियों की कीमत बढ़ाने की व्यवस्था है लेकिन जो संपत्तियां बार-बार आवेदन निकालने के बाद भी नहीं बिकती हैं, उसकी कीमत को फ्रीज कर दिया जाता है। कीमत फ्रीज होने के बाद संपत्तियों के दाम नहीं बढ़ते हैं। इसके बाद भी जब बिक्री नहीं होती तो अलोकप्रिय घोषित किया जाता है।

जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने कहा कि एलडीए की ही तरह अब यहां भी ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की तर्ज पर अलोकप्रिय संपत्तियों का आवंटन किया जाएगा। जीडीए बोर्ड ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कोई भी इच्छुक व्यक्ति घर बैठे ही ऐसी संपत्तियों का ऑनलाइन आवंटन करा सकेगा, जल्द ही इसके लिए सॉफ्टवेयर तैयार कर लिया जाएगा।
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