कृषकों से सस्ते में उपज खरीदकर क्रय केंद्र पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बेचने वाले फर्जी किसान अब ऐसा नहीं कर पाएंगे। शासन ने इस बार उपज बेचने के लिए पंजीकरण कराने वाले सभी किसानों की खतौनी, खेत का रकबा और अनुमानित उपज का सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। अभी तक सौ क्विंटल से अधिक उपज बेचने वाले किसानों का ही सत्यापन होता था।
क्षेत्रीय खाद्य निगम के विपणन अधिकारी राकेश मोहन पांडेय के मुताबिक बहुत छोटे रकबे के मालिक किसानों ने सौ क्विंटल से अधिक उपज बेची। इस तरह के खेल पर रोक लगाने के लिए शासन ने इस बार कई बदलाव किए हैं। पहला यह कि अब उपज बेचने के लिए पंजीकरण कराने वाले किसानों का सत्यापन अनिवार्य होगा। पहले सौ क्विंटल से कम उपज बेचने वाले किसान के सत्यापन पर कोई फोकस नहीं होता था। इससे अधिक उपज बेचने वाले किसानों का सत्यापन तहसील से कराया जाता था। अब पंजीकरण कराने वाले सभी किसानों की खतौनी, खेत का रकबा और उसमें होने वाली अनुमानित उपज का तहसील स्तर पर सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद ही किसान अपनी उपज केंद्र पर बेच सकेगा।
दूसरा बदलाव यह किया गया है कि हर क्रय केंद्र पर इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ परचेज (ईपॉप) मशीन के जरिए ही खरीद की जाएगी। ईपॉप मशीन यूआईडीएआई सर्वर से सीधे लिंक है। मशीन से किसान का आधार कार्ड स्कैन होगा, उसके बाद अंगूठा लगाकर बायोमेट्रिक सत्यापन होगा। आधार से बैंक खाता लिंक होने पर उपज बिक्री की धनराशि उसके खाते में सीधे हस्तांतरित हो जाएगी।
30850 किसान करा चुके हैं पंजीकरण
आरएमओ राकेश मोहन पांडेय के अनुसार मंगलवार तक जनपद में 30,850 किसानों ने खरीफ उपज बिक्री के लिए पंजीकरण कराया है। इनमें से 28,467 किसानों का सत्यापन किया जा चुका है। इनमें से 339 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने सौ क्विंटल या उससे अधिक उपज बिक्री के लिए पंजीकरण कराया है। इनके सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। 1338 किसानों का नाम उनके बैंक खाते से मैच नहीं होने के कारण सत्यापन पूर्ण नहीं हुआ है। 250 किसानों के खाते पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) से सत्यापन नहीं होने के कारण लंबित हैं।
ऐसे होता था उपज की बिक्री में खेल
सौ क्विंटल से कम उपज बेचने वाले किसानों का सत्यापन अभी तक केवल चेहरा देख कर किया जाता था। सूत्रों के मुताबिक फर्जी किसान इसी का फायदा उठाकर खेल करते थे। किसानों से कम कीमत पर अनाज खरीद कर उसे क्रय केंद्र पर एमएसपी पर बेचते थे। खुद को किसान बताने के लिए ये लोग छोटे रकबे का खेत खरीद कर खसरा खतौनी बनवा लेते हैं। इसी खतौनी के आधार पर वे पंजीकरण कराकर कई क्विंटल उपज बेच कर लाखों रुपये कमाते हैं।
पचास क्विंटल से कम उपज वाले किसान चार दिन बेच सकेंगे फसल
आरएमओ राकेश मोहन पांडेय ने बताया कि पचास क्विंटल से कम उपज वाले किसान सोमवार से बृहस्पतिवार तक अपनी फसल बेच सकते हैं। पचास क्विंटल से अधिक उपज वाले किसान शुक्रवार और शनिवार को फसल बेच सकेंगे। उन्होंने बताया कि उपज बेचने वाले किसान को क्रय केंद्र पर शाम चार बजे से पहले पहुंचना होगा। इसके बाद आने वाले किसानों की फसल की खरीद उस दिन नहीं होगी।