पौराणिक मान्यताएं
ज्योतिषाचार्य डॉ. जोखन पांडेय शास्त्री के अनुसार, पहली मान्यता यह है कि भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर को इसी दिन मारकर धरती वासियों को भय से मुक्ति दिलाई थी। इसी खुशी में उत्सव मनाया जाता है और दीपमालाएं आयोजित होती हैं। इसी कारण इसे छोटी दिवाली कहते हैं।
ये है महत्व
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, धन की देवी लक्ष्मी उसी घर में आती हैं, जहां सुंदरता और पवित्रता होती है। नरक चतुर्थी के दिन घर में सफाई जरूर करनी चाहिए। घर में किसी प्रकार का टूटा हुआ सजावटी सामान, बेकार फर्नीचर व अन्य उपयोग में न आने वाली वस्तुओं को यमराज का नरक माना जाता है। इसलिए इन्हें इस दिन घर से बाहर कर देना चाहिए। इस दिन सूर्योदय से पहले तेल और उबटन लगाकर स्नान करने का विधान है। प्रातः स्नान से सौंदर्य की प्राप्ति होती है और शरीर में दिव्य शक्ति का संचार होता है। कई प्रकार के रोगों से छुटकारा भी मिलता है।
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पंडालों में स्थापित हुई मां लक्ष्मी की प्रतिमाएं
महानगर की लक्ष्मी पूजा समितियों की ओर से विभिन्न मुहल्लों में बनाए गए पंडालों में शुक्रवार को मां लक्ष्मी की प्रतिमाएं स्थापित की गई। माता के पट शनिवार छोटी दिवाली के दिन विधि-विधान से पूजन-अर्चन के साथ भक्तों के लिए खोले जाएंगे। वहीं कुछ जगहों पर शुक्रवार को प्रतिमा स्थापना के साथ ही माता के पट खोल दिए गए। महानगर के माया बाजार, घंटाघर, बक्शीपुर, आर्यनगर, हुमायूंपुर, जाफरा बाजार, मोहद्दीपुर, निजामपुर, घासीकटरा, विष्णुपुरम, राप्तीनगर आदि जगहों पर माता के पंडाल बनाए गए हैं।
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