राम जन्म भूमि आंदोलन के दौरान महंत अवेद्यनाथ को गिरफ्तार कर देहरादून फारेस्ट हाउस में रखा गया था। इसकी जानकारी होने पर साधुओं का एक जत्था तीर-धनुष लेकर छत्तीसगढ़ और नागालैंड से गोरखनाथ मंदिर पहुंच गया। मंदिर में रात्रि विश्राम के बाद वह दूसरे दिन अयोध्या जाने को निकले तो पुलिस रोकने पहुंच गई। इस पर वह तीर-धनुष लेकर मोर्चे पर अड़ गए थे। उस समय के एडीएम प्रशासन शमशाद अहमद ने देहरादून में महंत अवेद्यनाथ से संपर्क साधा। उनके अनुरोध पर साधु मोर्चा से पीछे हटे और वापस अपने स्थान को जाने के लिए तैयार हुए।
यह संस्मरण बताते हुए पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यूपी सिंह भावुक हो गए। अयोध्या आंदोलन की यादों को ताजा कर 94 वर्ष की उम्र में भी जोश से भर जाते हैं। बताया कि रामजन्म भूमि आंदोलन उस समय जन आंदोलन बन चुका था। आंदोलन में समाज के हर वर्ग के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे थे।
कार सेवकों को रोकने के लिए सड़क मार्ग पर पहरा लगा था। ऐसे में मल्लाहों ने जलमार्ग से कार सेवकों को अयोध्या पहुंचाने का जो साहस दिखाया था उसे भुलाया जा नहीं सकता। उन्होंने बताया कि वर्ष 1991 से 1994 तक पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति का दायित्व निभाने के साथ ही विश्व हिंदू परिषद के काशी प्रांत का अध्यक्ष भी था। राम मंदिर आंदोलन के दौरान मुझे जौनपुर में नजरबंद कर दिया गया।
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