झारखंड से आए थे आदिवासी कारसेवक
द्वारिका तिवारी ने बताया कि झारखंड के रहने वाले करीब 50 की संख्या में आदिवासी कारसेवक भी मंदिर आ गए। वह अयोध्या जा रहे थे, लेकिन उन्हें गोरखपुर में रोक लिया गया। वे लोग मंदिर आए। उनके हाथ में तीर-कमान था। रात को वह मंदिर में रुके। सुबह उनमें से एक कारसेवक जो धनुष लिया था, उसने कारसेवकों को करतब दिखाया। फिर उन कारसेवकों को वह स्टेशन छोड़ने गए। ट्रेन से वापस झारखंड चले गए।
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जब ढांचा गिरा तो मंदिर में गूंजा जयश्रीराम का जयकारा
द्वारिका तिवारी ने बताया-1992 में प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। कल्याण सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। वह उस समय भी मंदिर में ही थे। अयोध्या की एक -एक गतिविधियों पर नजर थी। महंत अवेद्यनाथ अयोध्या में ही जमे हुए थे। कारसेवकों को अयोध्या जाने पर रोक नहीं होने के कारण लाखों कारसेवक अयोध्या पहुंच गए। 6 दिसंबर को कारसेवकों ने विवादित ढांचा गिरा दिया। यह सूचना मिलते ही मंदिर में जयकारा गूंजने लगा। जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा परिसर गुंजायमान हो गया। शाम होते ही कल्याण सिंह के इस्तीफे की खबर आते ही पूरा नजारा बदल गया।