सोमवार और मंगलवार को दो दिनों तक लगे कैंप में कई ऐसे आवेदकों के मामले भी सुलझ गए जो वर्षों से प्राधिकरण के चक्कर लगा रहे थे। उद्यमी विष्णु अजीत सरिया का बरगदवां में व्यावसायिक निर्माण को लेकर मानचित्र का आवेदन तो 12 साल से लटका था जिसे घंटे भर में निस्तारित कर दिया गया। पहले दिन कैंप में 45 आवेदन आए जबकि 15 शमन मानचित्र स्वीकृत किए गए जिनसे प्राधिकरण को एक करोड़ 66 लाख 49 हजार 598 रुपये की आय हुई।
वहीं संपत्तियों के 19 मामलों का निस्तारण हुआ। दूसरे दिन चार शमन मानचित्र स्वीकृत किए गए जिससे प्राधिकरण को 1 करोड़ 70 लाख 22 हजार 220 रुपये की आय होगी। इसके अलावा संपत्तियों के नामांतरण संबंधी नौ मामलों का भी निस्तारण हुआ।
जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने कहा कि यदि किसी को भी मानचित्र या नामांतरण संबंधी मामलों में किसी तरह की दिक्कत हो तो वह हर सप्ताह सोमवार और मंगलवार को आयोजित होने वाले कैंप में पहुंच कर अपनी समस्याएं बता सकता है। सभी का निस्तारण कराया जाएगा। मानचित्र आवेदनों को बेवजह अटकाने और समय से निस्तारित नहीं करने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
समय से पटल पर नहीं मिले अधिकारी-कर्मचारी तो नपेंगे
जीडीए उपाध्यक्ष ने प्राधिकरण के सभी अफसरों, कर्मचारियों को हिदायत दी है कि हर कोई समय से दफ्तर आने के साथ ही अपने पटल पर सुबह 10 बजे से 12 बजे तक मौजूद रहकर जन सामान्य की समस्याएं सुने। निरीक्षण में यदि कोई अफसर या कर्मचारी तय समय पर अपने पटल पर नहीं मिला तो कार्रवाई तय है। उन्होंने कहा कि दो दिन तक चले मानचित्र व नामांतरण निस्तारण कैंप में कई ऐसे मामले आए जो लंबे समय से लंबित हैं। समय से उनका निस्तारण नहीं किया गया, जो गंभीर विषय है। इससे जन सामान्य को असुविधा और परेशानी के साथ-साथ प्राधिकरण की छवि धूमिल होती है।