कानपुर के कारोबारी मनीष की मौत का मामला।
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मेडिकल कॉलेज के रिकॉर्ड में मनीष गुप्ता रात 2:30 बजे तक जिंदा थे। उन्हें रात 2:05 बजे मेडिकल कॉलेज लाया गया था। जरूरी औपचारिकता के बाद रात 2:14 बजे मनीष को सर्जरी विभाग में शिफ्ट किया गया था, जहां ऑक्सीजन लगाने के चंद मिनट बाद उनकी मौत हो गई थी। डॉक्टरों ने रात 2:30 बजे उन्हें मृत घोषित किया था।
मनीष के घरवाले कहते हैं कि फर्जी रिकॉर्ड मेंटेन किए गए हैं। इस थ्योरी की भी जांच होनी चाहिए। एडीजी ने भी सभी सीसीटीवी कैमरे को देखने को कहा है, ताकि यह पता चल सके कि घटना के बाद मनीष किस हाल में थे, किन रास्तों से पुलिस वाले उन्हें अस्पताल ले गए। अस्पताल में कितने लोग पहुंचे थे?
सीसीटीवी फुटेज से पहचान के बाद निलंबित हुए थे छह पुलिस कर्मी
होटल कृष्णा पैलेस में सोमवार रात हुई कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत के मामले में तत्कालीन इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह, दरोगा अक्षय मिश्रा, विजय यादव और दरोगा राहुल दुबे को अगले दिन यानी मंगलवार को ही निलंबित किया गया था। इसमें हेड कांस्टेबल कमलेश यादव व कांस्टेबल प्रशांत कुमार का भी नाम था। इसका मतलब था कि पुलिस ने होटल कृष्णा पैलेस के सीसीटीवी फुटेज को देखा, फिर सभी आरोपियों को निलंबित करने का आदेश जारी किया था। मनीष की पत्नी मीनाक्षी का सवाल था कि जब सीसीटीवी फुटेज में सभी पुलिस कर्मी दिख रहे हैं तो तीन के खिलाफ ही मुकदमा क्यों दर्ज किया गया? इसका जवाब पुलिस को देना ही चाहिए।
एडीजी अखिल कुमार ने बताया कि पुलिस साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करेगी। अगर छह लोग दोषी होंगे तो उनका नाम विवेचना में बढ़ जाएगा।