इधर, बर्खास्ती मामले में पुलिस मुख्यालय के आदेश का इंतजार किया जा रहा है। मामले की विवेचना क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर दिलीप पांडेय को दी गई है। उनके सहयोग में राजेश कुमार, सुनील पटेल, जनार्दन चौधरी को लगाया है। इस मामले में यूं तो छह पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है, मगर इंस्पेक्टर रहे जेएन सिंह, चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा, विजय यादव पर नामजद केस दर्ज है। इस बीच बृहस्पतिवार को मौका-ए-वारदात का निरीक्षण करने पहुंचे एडीजी अखिल कुमार ने भी यही कहा था कि साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई की जाती है। गिरफ्तारी से पहले साक्ष्य जुटाना होगा। साक्ष्य जुटाने के बाद ही गिरफ्तारी की जाएगी।
...तो आम लोगों की गिरफ्तारी क्यों?
पुलिस की खुद की बात आई तो सारा नियम बदल गया है। यही पुलिस आरोप के आधार पर केस दर्ज होते ही आरोपी को गिरफ्तार कर अपनी पीठ थपथपाने में पीछे नहीं रहती है। तब पुलिस कहती है कि घटना के चंद घंटे के भीतर गिरफ्तारी कर ली गई है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं है। आरोपी पुलिस वाले हैं इस वजह से पुलिस गिरफ्तारी नहीं, साक्ष्य संकलन की दलील दे रही है। इस बारे में सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहा है कि क्या आम लोगों के साथ भी अब ऐसा ही होगा?
होटल कर्मचारी से विवेचक ने की पूछताछ
कारोबारी मनीष की मौत मामले की विवेचना कर रहे क्राइम ब्रांच के दिलीप पांडे शुक्रवार को होटल पहुंचे थे। करीब डेढ़ घंटे तक होटल में मौजूद थे और छानबीन की। इस दौरान उन्होंने कर्मचारी आदर्श से पूछताछ की है, यह वही कर्मचारी है जो घटना के समय चेकिंग के दौरान पुलिस के साथ मौजूद था। खबर है कि उसने पुलिस को तीन लोगों के ठहरने और पुलिस के आने के समय की जानकारी दी है। हालांकि पुलिस वाले इस पर भी कुछ भी खुलकर नहीं बता रहे है।
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने कहा कि मामले की विवेचना के लिए सह विवेचक भी लगाए गए हैं। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। एसपी क्राइम निगरानी कर रहे हैं।