लखनऊ में गिरफ्तार हुए सोने के धंधेबाजों के तार सराफा बाजार से जुड़ने पर खुफिया तंत्र के कान खड़े हो गए हैं। अब स्थानीय जांच एजेंसी मामा-भांजा के कनेक्शन को ढूंढने में लगी है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि जांच एजेंसी को भनक न लगी हो। इसके पहले भी सोने के धंधेबाजाें तक पहुंचने में नाकामी ही हाथ लगी है।
हिंदी बाजार स्थित एक सराफा की दुकान में काम करने वाला कारीगर 52 ग्राम सोने के साथ पिछले महीने लापता हो गया था। वह बाजार के एक कटरे में ही दुकान पर सोना गलाने के काम करता था। 15 दिनों तक भाई के लापता होने पर परिजनों ने एसएसपी के पास गुहार तक लगाई थी।
सूत्र बताते हैं कि सोने की गलाई करने वाले कटरे में धंधेबाज अपने सोने को गलवाते भी हैं। लेकिन, किसका सोना? क्यों लेकर गायब हुआ? टीम बेखबर थी। ऐसे ही बाजार में एक दुकानदार का लगभग 900 ग्राम सोना गायब हो गया। एक व्यापारी की दुकान से करीब सवा दो किलो सोना तीन कर्मचारी लेकर फरार हो गए।
इस संबंध में राजघाट थाने में केस भी दर्ज है। इन सब मामलों में जमीनी स्तर पर एजंसियों को भनक तक नहीं लगी। इतनी बड़ी मात्रा में अवैध सोने का हेरफेर हो जाता है, लेकिन एलआईयू की तरफ से कोई ठोस रिपोर्ट शासन को नहीं सौंपी गई।