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Gorakhpur News: नाक के नीचे चल रहा था सोने का अवैध धंधा...भनक तक नहीं लगी

Sat, 16 Dec 2023 02:10 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

हिंदी बाजार में फुटकर सोने और चांदी के साथ आभूषणों की खरीद बिक्री होती है। रोजाना दूसरे जिलों या प्रदेश से खरीदार बाजार आते हैं और खरीदारी कर लौट जाते। अवैध सोने की आपूर्ति भी इसी बीच हो जाती है। लेकिन, जमीनी स्तर पर सूचनाएं संकलन कर अपने वरिष्ठों तक रिपोर्ट नहीं दिए जाने से ये सब बेखौफ और बिना रोकटोक से चलता है।
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(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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लखनऊ में गिरफ्तार हुए सोने के धंधेबाजों के तार सराफा बाजार से जुड़ने पर खुफिया तंत्र के कान खड़े हो गए हैं। अब स्थानीय जांच एजेंसी मामा-भांजा के कनेक्शन को ढूंढने में लगी है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि जांच एजेंसी को भनक न लगी हो। इसके पहले भी सोने के धंधेबाजाें तक पहुंचने में नाकामी ही हाथ लगी है।

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हिंदी बाजार स्थित एक सराफा की दुकान में काम करने वाला कारीगर 52 ग्राम सोने के साथ पिछले महीने लापता हो गया था। वह बाजार के एक कटरे में ही दुकान पर सोना गलाने के काम करता था। 15 दिनों तक भाई के लापता होने पर परिजनों ने एसएसपी के पास गुहार तक लगाई थी।

सूत्र बताते हैं कि सोने की गलाई करने वाले कटरे में धंधेबाज अपने सोने को गलवाते भी हैं। लेकिन, किसका सोना? क्यों लेकर गायब हुआ? टीम बेखबर थी। ऐसे ही बाजार में एक दुकानदार का लगभग 900 ग्राम सोना गायब हो गया। एक व्यापारी की दुकान से करीब सवा दो किलो सोना तीन कर्मचारी लेकर फरार हो गए।
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इस संबंध में राजघाट थाने में केस भी दर्ज है। इन सब मामलों में जमीनी स्तर पर एजंसियों को भनक तक नहीं लगी। इतनी बड़ी मात्रा में अवैध सोने का हेरफेर हो जाता है, लेकिन एलआईयू की तरफ से कोई ठोस रिपोर्ट शासन को नहीं सौंपी गई।
 

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बाहर से लेकर आते हैं अवैध सोना, घटना के बाद देंगे रिपोर्ट
हिंदी बाजार में फुटकर सोने और चांदी के साथ आभूषणों की खरीद बिक्री होती है। रोजाना दूसरे जिलों या प्रदेश से खरीदार बाजार आते हैं और खरीदारी कर लौट जाते। अवैध सोने की आपूर्ति भी इसी बीच हो जाती है। लेकिन, जमीनी स्तर पर सूचनाएं संकलन कर अपने वरिष्ठों तक रिपोर्ट नहीं दिए जाने से ये सब बेखौफ और बिना रोकटोक से चलता है। अब अगर अवैध सोने को खपाने में कहीं कोई हादसा या घटना हो जाए तो इसकी जिम्मेदारी पुलिस के कानून व्यवस्था पर आ जाती है।

एजेंसी खुद मानती, संख्या बल की कमी मजबूरी
इसी बीच एलआईयू के लोगों से बात करने पर पता चला कि वर्तमान में संख्या बल कम है। इसी वजह से काम में थोड़ी लापरवाही होती है। माना भी कि उनका मुखबिर तंत्र टूट चुका है। कहा, एजेंसियों की तरफ से सूचनाएं दी नहीं जाती। सूत्र अब वैसे रहे नहीं। ऐसे में बाजार के बीच से ऐसे लोगों को खोजना भी एक चुनौती है।
 
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