गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) से संपत्तियां आवंटित कराने वाले 200 से अधिक लोगों पर करीब 116 करोड़ रुपये की देनदारी है। गीडा प्रशासन अब इनपर सख्ती करने जा रहा है। सभी को 15 दिन की मोहलत दी गई है। समय से भुगतान नहीं हुआ तो संबंधित के खिलाफ आरसी जारी की जाएगी। साथ ही आवंटित संपत्ति को निरस्त कर दिया जाएगा।
गीडा की आठ परियोजनाओं में बड़ी संख्या में ऐसे बकाएदार हैं, जो लंबे समय से भुगतान नहीं कर रहे हैं। वहीं, 197 आवंटी ऐसे पाए गए हैं, जिनपर 10 लाख से ऊपर की धनराशि का बकाया है। बता दें कि गीडा से कोई संपत्ति आवंटित कराने पर कुल मूल्य का 25 प्रतिशत भुगतान कर कब्जा मिल जाता है। इसके बाद बाकी की धनराशि पांच वर्षों में चुकानी होती है।
हर साल छह-छह महीने की दो किस्त देनी होती है। इस किस्त को प्रीमियम कहते हैं। प्रीमियम के मद में ही सर्वाधिक 91 करोड़ 91 लाख रुपये का बकाया है। आवंटियों को रख-रखाव शुल्क भी देना होता है लेकिन इस मद में भी करीब 24.18 करोड़ रुपये जमा नहीं किए गए हैं। लीज रेंट के रूप में करीब 66 लाख 82 हजार रुपये का बकाया है। इनमें से भी 10 लाख रुपये से अधिक के बकाएदारों की अलग सूची बनाई गई है। सभी योजनाएं मिलाकर ऐसे 197 लोगों पर करीब 80 करोड़ रुपये का बकाया है।