कॉरिडोर विकसित होने से तेंदुओं की सुरक्षा होगी बेहतर।
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जिले में मधवलिया वन क्षेत्र में चार हेक्टेयर में बनने वाला लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर तेंदुओं के लिए संजीवनी साबित होगा। इसके लिए विभाग की ओर से पूरी कार्य योजना तैयार कर ली गई है। जब यह बनकर तैयार हो जाएगा तो तेंदुओं की सुरक्षा में आसानी होगी। इसके अलावा तेंदुओं की सुरक्षा एवं घायल होने पर उनके इलाज की बेहतर सुविधा रहेगी। सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग में तेंदुओ की बंश बृद्धि एवं उनकी सुरक्षा बेहतर ढंग से हो सकेगी।
तेंदुओं की हाफ सेंचुरी वाले सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग में तेंदुए भी महफूज नहीं रहे। अगर दस सालों के रिकार्ड पर गौर करें तो सात तेंदुओं की मौत हो चुकी है। वैसे तो मौत का कारण जानने के लिए वन विभाग मृत तेंदुओं का पोस्टमार्टम तो कराता है लेकिन कहीं सामान्य मौत तो कहीं ग्रामीणों के हमले से मौत का कारण बताता है।
कुछ बीमारी से भी मौत होने की बात कही जाती है। पूर्वांचल का जिम कारर्बेट माने जाने वाले सोहगीबरवां में तीन साल पहले हुई गणना के मुताविक तेदुओं की कुल संख्या 47 बताई जाती है। जिसमें 16 पर, 19 मादा तो 12 शावक बताए जाते हैं। ऐसे में लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर बन जाने से काफी सहुलियत मिलेगी।
सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी पुष्प कुमार कांधला ने बताया कि मधवलिया रेंज में लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर का निर्माण होगा। चार हेक्टेयर में बनने वाले इस सेंटर में एनिमल रेस्क्यू सेंटर में फर्स्ट एड रुम, सिंगल गेट, नाईट सेल, डे सेल, चौकीदार रुम आदि की ब्यवस्था होगी। वन्यजीवों की उपलब्धता व उनके बेहतर ईलाज की व्यवस्था करने के उद्देश्य से सेंटर का निर्माण होगा। इस सेंटर से काफी सहुलियत मिलेगी।