राज गंवाने के बाद भी राजा ने क्रांति का रास्ता नहीं छोड़ा। फिर एक रात कुलदेवी उनके सपने में आई और उन्होंने उन्हें खोया हुआ राज और स्वराज दोनों मिलने का आशीर्वाद दिया। दूसरे दिन राजा गिरफ्तार हो गए। उन्हें अंडमान जेल में डाल दिया गया। लेकिन देवी की कृपा से अंग्रेजों ने उनके वंशजों को सतासी राज वापस कर दिया।
सतासी राज के गजपुर नरेश का नाम कुलदेवी के नाम पर राजा पहाड़ सिंह रखा गया। फत्तेपुर के क्षत्रिय भी उन्ही के वंशज हैं। सतासी राज से जुड़े श्रीनेत ठाकुर भी पहाड़ सिंह देवी को कुलदेवी मानकर पूजा करते हैं। नगर में देवी की पूजा हर वर्ग करता है।
विशेषकर गोला वार्ड के वैश्य समाज जी देवी में काफी आस्था है नवरात्र ने मंदिर पर रोज श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। श्रीनेत घराने के धनंजय सिंह कहते है कुलदेवी पूरे सतासी राज की रक्षा करती हैं।
नेपाल की सीमा जहां तक सतासी राज फैला था, आज भी लोग वहां से देवी का दर्शन करने आते हैं। सतासी राज की उत्तराधिकारी कादंबरी सिंह ने कहा कि कुलदेवी की हर साल विधिवत पूजा होती है।