पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन देवतागण दिवाली मनाने पृथ्वी पर आते हैं। मान्यता के अनुसार त्रिपुर के नाश से प्रसन्न होकर देवताओं ने काशी में पंचगंगा घाट पर दीपोत्सव का आयोजन किया था। एक अन्य मान्यता के अनुसार काशी के राजा देवदास ने अपने राज्य में देवताओं को प्रतिबंधित कर दिया था।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन रूप बदलकर भगवान शिव ने पंचगंगा घाट पर गंगा स्नान और अर्चन किया। जब यह बात राजा देवदास को मालूम हुई तो उन्होंने प्रतिबंध समाप्त कर दिया। इससे प्रसन्न होकर देवताओं ने दिवाली मनाई। काशी में देव दिवाली का जिक्र ह्वेनसांग ने भी किया है। ह्वेनसांग ने राजा हर्षवर्धन के समय में भारतवर्ष का दौरा किया था।