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गोरखपुर हथिनी मौत मामला: सही समय पर शुरू हो जाता उपचार तो नहीं जाती मधुमती की जान, सूचना देने में कर दी देरी

Thu, 29 Jun 2023 03:43 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी सिकरीगंज।

सार

डीएफओ विकास यादव ने कहा कि हथिनी का पंजीकरण नहीं था। उसकी तबीयत खराब होने की सूचना मंगलवार को मिली थी। चिकित्सकों को टीम को उपचार के लिए भेजा था, लेकिन मौत हो गई। पोस्टमार्टम में मौत की वजह से सांस का उखड़ना सामने आया है। विसरा जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है।
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मृत मधुमती हथिनी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर जिले में कमलेश्वर दुबे की 18 वर्ष की हथिनी मधुमती का उपचार अगर सही समय पर शुरू हो गया होता, तो शायद उसकी मौत नहीं होती। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मधुमती की मौत का कारण सांस उखड़ना आया है। मतलब, भारी शरीर की हथिनी को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और सही समय पर उसे उपचार नहीं मिलने पर सांस उखड़ गई।

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पोस्टमार्टम टीम में शामिल चिकित्सक ने बताया कि हथिनी अस्वस्थ थी और एक ही जगह पर ही पांच से छह दिन तक लेटी रही। इससे उसके फेफड़े पर लगातार दबाव बनता रहा। वहीं, स्थिति बिगड़ने पर मंगलवार को हथिनी के अस्वस्थ होने की सूचना वन विभाग को दी गई थी। दोपहर में टीम पहुंची तो उसकी सांस उल्टी चल रही थी। उपचार के दौरान रात 10 बजे उसकी मौत हो गई।

सिकरीगंज थाना क्षेत्र के जैपालपार निवासी कमलेश्वर दुबे की हथिनी मधुमती ने इलाज के दौरान मंगलवार की रात में घर पर ही दम तोड़ दिया था। अंतिम संस्कार उनके घर के सामने खेत में कर दिया गया। इस दौरान आसपास गांव के सैकड़ों लोग इकट्ठा रहे। दरअसल, जैपालपार निवासी कमलेश्वर दुबे कई पुश्त से हाथी पालते आ रहे हैं। यह हथिनी मधुमती पिछले 15 साल से उनके पास थी।
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हथिनी के दफनाए जाने वाले स्थान पर जुटी भीड़। - फोटो : अमर उजाला।
जानकारी के मुताबिक, 20 तारीख को महावत मधुमती को लेकर महदेवा की तरफ जा रहा था। इसी दौरान चलते-चलते गांव के बगल में ही खड़ी हो गई और कुछ ही देर बाद अचानक से बैठ गई। महावत ने इसकी जानकारी मालिक को दी। कमलेश्वर दुबे ने हथिनी को ट्रक पर रखवाकर घर ले आए।

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पशु चिकित्सकों से उपचार करवाने की जगह स्थानीय पशु चिकित्सकों से और आयुर्वेदिक इलाज शुरू करा दिया। इससे उसकी तबीयत और बिगड़ती चली गई। मंगलवार को हथिनी की हालत और ज्यादा बिगड़ने पर उपचार की सूचना डीएफओ को दी। दोपहर में डीएफओ ने तीन चिकित्सकों की टीम गठित कर उपचार के लिए मौके पर भेजा था। इसी बीत रात 10 बजे हथिनी की मौत हो गई।
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उपचार के लिए आगरा से आ रहे थे चिकित्सक

डीएफओ ने हथिनी के अस्वस्थ होने पर तीन चिकित्सकों की टीम बनाकर उपचार से लिए भेज दिया था। गंभीर हालत की रिपोर्ट मिलने के बाद तत्काल आगरा हाथी संरक्षण केंद्र से भी चिकित्सकों की टीम बुलवा लिया गया था। चिकित्सक अभी बाराबंकी तक ही पहुंचे थे कि हथिनी की मौत हो गई।

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डीएफओ विकास यादव ने कहा कि हथिनी का पंजीकरण नहीं था। उसकी तबीयत खराब होने की सूचना मंगलवार को मिली थी। चिकित्सकों को टीम को उपचार के लिए भेजा था, लेकिन मौत हो गई। पोस्टमार्टम में मौत की वजह सांस का उखड़ना सामने आया है। विसरा जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है।

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