हथिनी के दफनाए जाने वाले स्थान पर जुटी भीड़।
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जानकारी के मुताबिक, 20 तारीख को महावत मधुमती को लेकर महदेवा की तरफ जा रहा था। इसी दौरान चलते-चलते गांव के बगल में ही खड़ी हो गई और कुछ ही देर बाद अचानक से बैठ गई। महावत ने इसकी जानकारी मालिक को दी। कमलेश्वर दुबे ने हथिनी को ट्रक पर रखवाकर घर ले आए।
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पशु चिकित्सकों से उपचार करवाने की जगह स्थानीय पशु चिकित्सकों से और आयुर्वेदिक इलाज शुरू करा दिया। इससे उसकी तबीयत और बिगड़ती चली गई। मंगलवार को हथिनी की हालत और ज्यादा बिगड़ने पर उपचार की सूचना डीएफओ को दी। दोपहर में डीएफओ ने तीन चिकित्सकों की टीम गठित कर उपचार के लिए मौके पर भेजा था। इसी बीत रात 10 बजे हथिनी की मौत हो गई।
डीएफओ ने हथिनी के अस्वस्थ होने पर तीन चिकित्सकों की टीम बनाकर उपचार से लिए भेज दिया था। गंभीर हालत की रिपोर्ट मिलने के बाद तत्काल आगरा हाथी संरक्षण केंद्र से भी चिकित्सकों की टीम बुलवा लिया गया था। चिकित्सक अभी बाराबंकी तक ही पहुंचे थे कि हथिनी की मौत हो गई।
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डीएफओ विकास यादव ने कहा कि हथिनी का पंजीकरण नहीं था। उसकी तबीयत खराब होने की सूचना मंगलवार को मिली थी। चिकित्सकों को टीम को उपचार के लिए भेजा था, लेकिन मौत हो गई। पोस्टमार्टम में मौत की वजह सांस का उखड़ना सामने आया है। विसरा जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है।