सनातन धर्म की अलख जगाने के उद्देश्य से एक महीने के लिए राष्ट्रोत्कर्ष अभियान यात्रा पर निकले गोवर्धन मठ पुरी के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज शनिवार को सिद्धार्थनगर पहुंच चुके हैं। वृंदावन से शुरू हुई उनकी धर्मयात्रा सिद्धार्थनगर के रास्ते नेपाल तक जाएगी। इसके बाद महराजगंज होकर गोरक्षनगरी में उनका दो दिनों का प्रवास होगा। यहां से बंगाल होकर अपने मठ वापस पहुंचेंगे। इस दौरान वे धर्मसभाएं तो करेंगे ही सनातन धर्म को लेकर आचार्यों, वेदाचार्यों के साथ प्रबुद्धजनों से सीधा संवाद करके उनकी जिज्ञासा शांत करेंगे।
शंकराचार्य की धर्मयात्रा 11 अक्तूबर से वृंदावन से शुरू हुई है। आगरा प्रवास के बाद अब उन्होंने पूर्वांचल की धरती पर कदम रखा है। सिद्धार्थनगर में रविवार को प्रवास के दौरान धर्मसभा और संगोष्ठी को संबोधित करेंगे। इसके बाद 25 अक्तूबर को नेपाल चले जाएंगे। वहां भैरवा में दो दिन रहेंगे। फिर 27 अक्तूबर को आनंदनगर, महराजगंज लौट आएंगे। यहां 28 अक्तूबर को धर्मसभा में शामिल होंगे। दो दिन गोरखपुर में प्रवास के बाद पश्चिम बंगाल के लिए चले जाएंगे। गोरखपुर में शंकराचार्य 28 अक्तूबर की शाम पांच बजे तक आ जाएंगे। उन्हें रिसीव करने भारी संख्या में भक्तगण आनंदनगर जाएंगे। उनकी यात्रा के दौरान पालकी पैर बैठाकर बैंड बाजा की धुन पर थिरकते हुए भक्त गण आगे-आगे नाचते-झूमते चलेंगे।
आठ से दस लोगों से करेंगे धर्म पर संवाद
शंकराचार्य सेवा समिति ने गोरखपुर में आयोजन को लेकर तैयारियां तेज कर दी है। सचिव राजेश सिंह ने बताया कि 28 अक्तूबर को उनके आवास पर ही शंकराचार्य के ठहरने का इंतजाम किया गया है। जहां कुछ विशिष्ट लोग मिलकर आशीर्वाद लेंगे। दूसरे दिन यानी 29 अक्तूबर की सुबह दीक्षा कार्यक्रम होगा। इसके बाद बुद्ध विहार पार्ट एक स्थित पार्क में संगोष्ठी में शिरकत करेंगे। संगोष्ठी में शंकराचार्य प्रबुद्ध वर्ग के लोगों से सनातन धर्म पर संवाद करेंगे। आठ से दस लोगों को धर्म से जुड़े सवाल पूछने का मौका मिलेगा।
पूर्वांचल एक्सप्रेस से जाएंगे कोलकाता
शंकराचार्य 30 अक्तूबर को पूर्वांचल एक्सप्रेस से कोलकाता के लिए रवाना होंगे। आयोजन सचिव राजेश सिंह ने बताया कि शंकराचार्य पूजा-अर्चना के बाद ही अपनी यात्रा शुरू करते हैं। सुबह में वे कुछ परिवारों को दीक्षा भी देंगे।