अंतरराष्ट्रीय पहलवान साक्षी मालिक ने कहा, बेटियां भी घर का अभिमान, खुलकर हौसला दें
गोरखपुर। खेलो इंडिया जैसे प्लेटफॉर्म से युवाओं को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और सुविधाएं मिल रही हैं। इसका सुखद परिणाम भी सामने आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में भारत का नाम तेजी से रोशन हो रहा है। यह कहना गलत है कि कुश्ती अब देश में विलुप्त हो रही है। पिछले चार ओलंपिक में भारत को कुश्ती में ही पदक मिला है। बेटियां भी बेटों से किसी मायने में कम नहीं हैं। माता-पिता बेटों की ही तरह बेटियों को भी खुलकर प्रोत्साहन दें। बेटियां भी घर का अभिमान बनेंगी, आप उनपर विश्वास तथा समर्थन तो करिये। ओलंपिक के इतिहास में महिला कुश्ती में भारत के लिए पहला पदक जीतने वाली अंतरराष्ट्रीय पहलवान साक्षी मालिक ने कहा कि आज महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में पुरुषों के बराबर अपनी उपस्थिति दर्ज कर रही हैं।
सहजनवां के मुरारी इंटर कॉलेज में चल रही स्व. रविंद्र सिंह और भारत भीम जनार्दन सिंह स्मृति सीनियर स्टेट कुश्ती चैंपियनशिप में पहलवानों का उत्साह बढ़ाने के लिए साक्षी मालिक शनिवार को गोरखपुर पहुंचीं। चैंपियनशिप के सचिव आदित्य प्रताप सिंह आगू के बेतियाहाता स्थित आवास पर एक बातचीत में उन्होंने कहा कि आज देश में खेल और खिलाड़ियों की स्थिति में बहुत सुधार हुआ है। साक्षी मालिक ने कहा कि उनके दादा पहलवान थे। कुश्ती के लिए उनसे प्रेरणा मिली। घर के पास अखाड़ा था। सुबह और शाम में वहां प्रैक्टिस करने जाते थे। स्कूल भी जाना पड़ता था। तब उतने संसाधन भी नहीं थे। एक दिन किसी ने कहा कि जब बड़ी खिलाड़ी बन जाओगी तब हवाई जहाज में बैठने का मौका मिलेगा। उसके बाद दादा से वादा कर यह ठान लिया कि खिलाड़ी ही बनना है। अच्छा खिलाड़ी बनकर हवाई जहाज में बैठने का सपना पूरा करना है।