हिंदी बाजार में सोने-चांदी के अवैध कारोबार पर शासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। शासन की ओर से क्षेत्राधिकारी, कोतवाली से सोने-चांदी के धंधेबाजों के बारे में जानकारी मांगी गई है। हालांकि, स्थानीय एजेंसियों के पास इसे लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है। सराफा मंडल के पदाधिकारियों से भी पूछताछ की गई है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाने में लगी है।
दरअसल, सुल्तानपुर पुलिस और डीआरआई ने एक सितंबर को हिंदी बाजार के तीन कर्मचारियों को हिरासत में लेकर उनके पास से एक किलो अवैध सोना बरामद किया था। डीआरआई की टीम ने पंडित के दुकान पर जाकर पूछताछ भी की थी। इसके अलावा हाल्सीगंज के एक व्यापारी की दुकान से उनके कर्मचारियों ने भी दो किलो से अधिक सोने के आभूषण चोरी कर ली थी।
यह आरोप लगाते हुए व्यापारी ने राजघाट थाने में मुकदमा दर्ज करवाया था। लेकिन जांच में सामने आया कि उस सोने के आभूषणों पर बीआईएस मार्का नहीं था। इस मामले में स्थानीय पुलिस ने जांच की, लेकिन चोर और सोने के आभूषणों की बरामदगी नहीं कर सकी।
सराफा मंडल भी बना अंजान
क्षेत्राधिकारी कोतवाली की तरफ से सराफा मंडल के पदाधिकारियों से पिछले दिनों इस संबंध में पूछताछ की गई है। बताया गया कि शासन की तरफ से संदिग्ध अवैध सराफा कारोबारियों की सूचना मांगी गई है। सराफा मंडल के अध्यक्ष गणेश वर्मा ने बताया कि उनसे कोतवाली क्षेत्राधिकारी की तरफ से पूछताछ की गई थी। लेकिन उन्हें अवैध सोने के धंधेबाजों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।