चिड़ियाघर में पीलीभीत से रेस्क्यू कर लाए बाघ की आक्रामकता अभी कम नहीं हो रही है। उसे रेस्क्यू सेंटर के क्वारंटीन सेल में रखा गया है। जब-जब वह कीपर को देख रहा है, उसकी गुर्राहट और भी तेज हो जा रही है। पीलीभीत में उसने कई इंसानों पर हमला किया था। चिड़ियाघर के विशेषज्ञाें का कहना है कि अभी तक उसने अपना पूरा जीवन जंगल में व्यतीत किया है। इसी वजह से वह तनाव में है।
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) में पीलीभीत से रेस्क्यू कर लाया गया आदमखोर और भारीभरकम बाघ अभी बंधन और अनुशासन वाले माहौल में खुद को नहीं ढाल पा रहा है। वह तनाव में दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि कीपर को देखते ही बहुत जोर से गुर्राता है।
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चिड़ियाघर में पीलीभीत से रेस्क्यू कर लाए बाघ की आक्रामकता अभी कम नहीं हो रही है। उसे रेस्क्यू सेंटर के क्वारंटीन सेल में रखा गया है। जब-जब वह कीपर को देख रहा है, उसकी गुर्राहट और भी तेज हो जा रही है। पीलीभीत में उसने कई इंसानों पर हमला किया था। चिड़ियाघर के विशेषज्ञाें का कहना है कि अभी तक उसने अपना पूरा जीवन जंगल में व्यतीत किया है। इसी वजह से वह तनाव में है। तनाव कम करने के लिए दवाएं दी जा रही हैं।
चिड़ियाघर में इस वक्त कुल चार बाघ हैं। पीलीभीत से रेस्क्यू कर लाया गया नर बाघ इनमें सबसे विशालकाय है। एक सामान्य बाघ का औसत वजन करीब 210 से 230 किलोग्राम होती है, लेकिन इसकी करीब 275 से 300 किलोग्राम है। रेस्क्यू सेंटर में वह अकेलापन महसूस कर रहा है।
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एहतियातन कम की गई डाइट
नर बाघ क्वारंटीन सेल में है। इसकी वजह से उसको चलने-फिरने के लिए उतनी जगह नहीं मिल पा रही है। ऐसे में ज्यादा मीट देने से उसकी तबीयत खराब न हो, इसके लिए उसकी डाइट को कंट्रोल किया जा रहा है। चिड़ियाघर के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि आमतौर पर बाघों को 10 से 12 किलो मीट दिया जाता है, लेकिन इसे फिलहाल आठ से नौ किलो दिया जा रहा है।