आरोपियों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि एक ग्राहक से हुक्का लगाने के लिए पांच सौ से आठ सौ रुपये वसूले जाते हैं। उनसे होने वाली आमदनी से ही स्टॉफ का खर्चा भी निकालते हैं। हुक्का बार कितने समय से चल रहा है, इस पर कोई सटीक जानकारी तो नहीं दिए, लेकिन लंबे समय से चलाए जाने की बात आरोपियों ने स्वीकारी है।
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गोरखपुर शहर में धड़ल्ले से बिना लाइसेंस के हुक्का बार खोले गए हैं। सिर्फ बड़े सात रेस्त्रां वालों ने प्रशासन को हुक्का बार की जानकारी दी है, अन्य सभी अवैध रूप से ही संचालित हो रहे हैं। जबकि, शहर में फिलहाल 39 हुक्का बार हैं। इनका लाइसेंस रेस्टोरेंट के नाम पर लिया गया है। इन हुक्का बारों में नाबालिगों को तंबाकू फ्लेवर का हुक्का पिलाने की शिकायत पुलिस को मिली, जिसके बाद जांच शुरू की गई है।
जानकारी के मुताबिक, शहर के गोलघर, बैंक रोड, असुरन, मेडिकल काॅलेज रोड, देवरिया बाइपास, जेल बाइपास, रुस्तमपुर, गोरखनाथ में अत्याधुनिक साज-सज्जा युक्त हुक्का बार संचालित हो रहे हैं। रोजाना शाम को यहां युवक व युवतियों की भीड़ जुटती है। शहर में चोरी से चल रहे हुक्का बार ने पुलिस व प्रशासन के लिए चुनौती खड़ी कर दी है।
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रेस्टोरेंट की आड़ में चल रहे हुक्का बार में जुटे युवा देर रात तक नशे की पार्टी करते हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान अभियान चलाकर हुक्का बार संचालकों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की थी, लेकिन इसके बाद अभियान रुक गया।