राजा बृषभसेन की मृत्यु के बाद उनके पुत्र रत्नसेन निचलौल के राजा हुए तथा अपने पिता की तरह अपनी पत्नी स्वर्ण रेखा के साथ प्रति दिन पंचमुखी शिवलिंग की पूजा अर्चना किया करते थे। राजा रत्नसेन के शासनकाल में एक दिन कुछ चोर रात्रि में चोरी के उद्देश्य से राज्य में प्रवेश कर रहे थे।
जब वे पंचमुखी शिव मंदिर के सामने पहुंचे तो मंदिर के अंदर से आवाज आई गांव वालों जागो चोर चोरी करने गांव में आ गए हैं। इससे गांव के लोग जग गए और चोर भाग गए।
मंदिर से सटे डुमरी निवासी पंडित अनिरुद्ध तिवारी व मुन्ना गिरी बताते हैं कि जिस आम के जड़ से पंचमुखी भगवान शिव का प्रादुर्भाव हुआ है। वह अपने आप में एक अनोखा वृक्ष था। बुजुर्गो के अनुसार एक बार एक बंदर उस आम के पेड़ पर चढ़ गया परंतु बहुत प्रयास के बाद भी नीचे नहीं उतर सका।
भूख प्यास से उसकी मृत्यु हो गई। जहां बंदर मरा था। वहां हनुमान मंदिर बनाया गया है। आम का वृक्ष गिर जाने के बाद पंचमुखी शिवलिंग पर गड़ौरा निवासी स्वर्गीय चंद्रशेखर मिश्र ने 1968-69 में मंदिर का निर्माण कराया।