एबीसी पब्लिक स्कूल के अरुण कुमार ने बताया कि हिंदी भाषा पिछड़ेपन की निशानी नहीं है। तकनीक से लेकर सरकारी कामकाज और उच्च शिक्षा को हिंदी भाषा में लागू करने की जरूरत है। कक्षा में बच्चों को विषय की गहराई और उसकी हमारी संस्कृति से लगाव से जोड़कर पढ़ाता हूं। इससे बच्चों के अंदर मातृभाषा के प्रति सम्मान का भाव पैदा होता है।
समाज को जोड़ने का काम करती है भाषा
आर्मी पब्लिक स्कूल के बीके राय ने बताया कि भाषा समाज को जोड़ने का काम करती है। इसका विस्तार लोगों से ही होता है। विश्व की तीन हजार भाषाओं में हिंदी को उच्च स्थान प्राप्त है। कक्षा में हिंदी भाषा के उज्ज्वल स्वरूप को बताया जाता है। इसकी गुणवत्ता, शिल्प कौशल और सौंदर्य पर ध्यान देता हूं, जो बच्चों को बेहद रास आता है।