दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में मिड टर्म परीक्षा में गलत पेपर मिलने पर छात्रों ने हंगामा शुरू कर दिया, जिसके बाद परीक्षा को निरस्त कर दिया गया और उसे बाद में कराने का निर्णय लिया गया। हालांकि, विवि प्रशासन का कहना था कि प्रवेशपत्र पर गलत कोड छपने के चलते छात्रों को गलतफहमी हुई।
दरअसल, बृहस्पतिवार को दीक्षा भवन में चौथी पाली में अपराह्न तीन से चार बजे तक एमए अर्थशास्त्र तृतीय सेमेस्टर के डेमोग्राफी की परीक्षा थी। छात्रों के प्रवेशपत्र पर भी डेमोग्राफी का कोड ही छपा था। लेकिन, जब छात्र परीक्षा देने पहुंचे तो उन्हें हिस्ट्री ऑफ डॉक्टरिन का पेपर दे दिया गया। यह पेपर छात्रों को पढ़ाया ही नहीं गया था।
इसके बाद छात्र भड़क गए और हंगामा करने लगे। छात्रनेता योगेश प्रताप सिंह के नेतृत्व में छात्र नारेबाजी करते हुए प्रशासनिक भवन पहुंचकर विरोध दर्ज कराने लगे। उनकी बातों को सुनने के बाद परीक्षा नियंत्रक राकेश कुमार ने मामले की छानबीन की तो पता चला कि प्रश्नपत्र पर गलत कोड छपने से यह गलतफहमी हुई।
परीक्षा नियंत्रक ने डेमोग्राफी के पेपर को पांच नवंबर को दोपहर एक बजे से से दो बजे के बीच कराने और सात नवंबर को अपराह्न तीन से चार बजे के बीच इकोनामिक ग्रोथ का पेपर कराने का निर्णय लिया। जिसके बाद मामला शांत हुआ।
छात्रनेता योगेश सिंह ने कहा कि यह सारी समस्या सीबीसीएस प्रणाली को अपनाने में की गई जल्दबाजी से हुआ है। छात्रों ने परीक्षा फॉर्म में सही कोड भरा था, पढ़ाई भी उसी के अनुसार हुई। लेकिन, परीक्षा के दौरान दूसरा पेपर दे दिया गया। इस कार्य को करने वाली एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
विरोध दर्ज कराने वालों में अंकित पांडेय, सुमित सिंह, अनुराग दुबे, केपी यादव, सुमित यादव, विकास पांडेय, शालिनी मिश्रा, अपर्णा तिवारी, मांशी मिश्रा, शिवांशी आदि शामिल रहे।