सोमवार दोपहर अस्पताल के ओपीडी ब्लॉक में केवल जनरल फिजिशियन डॉ. आशुतोष राय के कमरे के बाहर ही भीड़ थी। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवानंद सिंह ने करीब 30 मरीज देखे थे। अब वे मरीजों के इंतजार में बैठे थे। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश पांडेय ने बताया कि यहां ईसीजी की भी सुविधा उपलब्ध है। पूरे महीने में करीब 100 लोगों की ईसीजी कराई गई है।
ओपीडी वार्ड में मिले राजेश ने कहा कि अस्पताल का नाम सुनने से ऐसा लगता है कि यहां केवल टीबी रोग का ही इलाज होता है। यहां आने पर पता लगा कि कई विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। अस्पताल गेट के पास खुली चाय की दुकान पर बैठे बुजुर्ग रामसुंदर गुप्ता का कहना था कि अब तो कुछ लोग यहां आने भी लगे हैं, साल भर पहले तो लोग इसका नाम सुनते ही डरते थे।
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हड्डी रोग के दो, जनरल फिजिशियन दो, हृदय रोग के एक, सर्जन दो, बाल रोग के दो, प्रसूति रोग की एक, महिला संबंधित रोग की दो, चर्म रोग के एक और आंख के एक डॉक्टर तैनात हैं। इसके अलावा डेंटल हाइजिनिस्ट एक, आंख जांच के एक, अल्ट्रसाउंड, ईसीजी व एक्सरे टेक्नीशियन भी तैनात हैं। हर दिन 25 से 30 एक्सरे व 10-12 अल्ट्रसाउंड होता है। लेकिन, फार्मासिस्ट की कमी है। यहां स्वीकृत तीन पदों के सापेक्ष केवल एक फार्मासिस्ट की तैनाती है। वहीं दवा काउंटर से लेकर वार्ड तक के इंचार्ज हैं।
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100 बेड के इस अस्पताल में ऑक्सीजन व वेंटीलेटर युक्त बेड हैं, लेकिन वार्ड में ताला बंद है। केवल दो वार्ड खुले हैं, जिनमें डेंगू के 11 मरीज भर्ती हैं। अन्य वार्ड में लगे बेड खाली हैं। तीन महिला डॉक्टर और दो स्टॉफ नर्स होने के बावजूद यहां महिलाओं के लिए बना वार्ड भी बेकार साबित हो रहा है।
यहां गर्भवती तो आती हैं, लेकिन प्रसव के लिए जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज या किसी निजी अस्पताल को ही चुनती हैं। जब मरीज ही नहीं हैं तो परिसर की साफ-सफाई की व्यवस्था भी बिगड़ रही है। ग्राउंड फ्लोर पर स्थित वार्ड में सन्नाटा पसरा रहता है। परिसर के अन्य हिस्सों में भी आवागमन बेहद कम है।
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शासन ने टीबी रोगियों के लिए इलाज के लिए जिले में एक अस्पताल बनाने के लिए पांच करोड़ रुपये भेजा था, लेकिन जमीन नहीं मिल रही थी। डीएम ने टीबी मरीजों के लिए काम करने वाली संस्था चारु चंद्र दास ट्रस्ट के सचिव डॉ. नसीम अरशद से संपर्क किया। ट्रस्ट ने एयरपोर्ट के पास नंदानगर स्थित पांच एकड़ जमीन अस्पताल के लिए दान कर दी। डॉ. नसीम बताते हैं कि जब अस्पताल बनकर तैयार हुआ तो इसके नाम से चार चंद्र दास का नाम ही गायब हो गया। इस पर शासन को पत्र भेजा गया। अब अफसरों ने अस्पताल के नाम में परिवर्तन करने और परिसर में चारु चंद्र दास की मूर्ति लगवाने का आश्वासन दिया है।
सीएमओ डॉ. आशुतोष दुबे ने कहा कि 100 बेड टीबी अस्पताल में सभी प्रकार के मरीजों का इलाज होता है। यहां नेत्र रोग से लेकर प्रसव की सर्जरी तक का इंतजाम है। लोगों को यहां हर प्रकार के इलाज की सुविधा मिल रही है। धीरे-धीरे मरीजों की संख्या बढ़ रही है।