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Tokyo Olympics: गोरखपुर के इस खिलाड़ी ने टोक्यो ओलंपिक 1964 में किया था कमाल, पाकिस्तान को हराकर लिया था बदला

Fri, 23 Jul 2021 04:28 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

इससे पहले रोम ओलंपिक 1960 का फाइनल मुकाबला भारत और पाकिस्तान के बीच खेला गया और यह मैच भारत हार गया था। वहीं 1964 में भी यही दोनों टीमें फाइनल में पहुंची थीं। भारत पाकिस्तान को हराकर पुरानी हार का बदला लेना चाहता था।
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भारतीय हॉकी खिलाड़ी, टोक्यो ओलंपिक 1964 - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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आज से टोक्यो ओलंपिक 2020 का आगाज हो गया है, ऐसे में हम आपको टोक्यो ओलंपिक 1964 की कहानी बताने जा रहे हैं क्योंकि टोक्यो ओलंपिक 1964 गोरखपुर के लिए बहुत विशेष है। अब तक का यह एकमात्र ऐसा ओलंपिक था, जब स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम में गोरखपुर का खिलाड़ी भी शामिल था। उस खिलाड़ी का नाम ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अली सई है।

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 टोक्यो ओलंपिक 1964 में भारत से मात्र हॉकी टीम ने हिस्सा लिया था। उस समय भारतीय हॉकी टीम पर जीत का बहुत दबाव था। ऐसे इसलिए भी था कि इससे पहले रोम ओलंपिक 1960 का फाइनल मुकाबला भारत और पाकिस्तान के बीच खेला गया और यह मैच भारत हार गया था। वहीं 1964 में भी यही दोनों टीमें फाइनल में पहुंची थीं। भारत पाकिस्तान को हराकर पुरानी हार का बदला लेना चाहता था।

अली सईद बताते हैं कि उस समय भारतीय हॉकी टीम के चयन में काफी सावधानी बरती गई थी। खिलाड़ियों को अभ्यास के बहुत मौके दिए गए। कैंप में पहले 80 खिलाड़ियों का चयन किया गया। उनमें से 40 खिलाड़ियों को अलग छांटा गया। अंत में 18 खिलाड़ियों की टीम बनी थी। तब एस्ट्रोटर्फ नहीं था। घास के मैदान पर ही हॉकी खेला जाता था।
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भारत पाकिस्तान में हुआ था फाइनल

भारत और पाकिस्तान का मुकाबला हमेशा से कड़ा रहा है। ऐसे में इस मैच के दौरान भी तनाव बहुत बढ़ गया था। खेल के मैदान में मैच के बीच कई बार अंपायरों को दखल देना पड़ा था। अंतत: मोहिंदर लाल के शानदार गोल की बदौलत भारत ने वह मैच 1-0 से जीत लिया था।

पूर्व ओलंपियन अली सईद ने कहा कि इस बार भारतीय टीम इतिहास को दोहराएगी। इस बार खिलाड़ियों को आखिरी क्षण तक पूरी क्षमता के साथ खेलना होगा। भारतीय टीम हर खेल में शानदार प्रदर्शन कर रही है। हॉकी समेत सभी खेलों को मेरी शुभकामनाएं।

बता दें कि गोरखपुर जिले से अभी तक तीन खिलाड़ी ओलंपिक में हिस्सा ले चुके हैं। इसमें एसएम अली सईद टोक्यो ओलंपिक 1964 में हॉकी में स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य थे। वह आउट साइड लेफ्ट खिलाड़ी थे। वहीं प्रेम माया मास्को ओेलंपिक 1980 में महिला हॉकी टीम की सदस्य थीं। वह फॉरवर्ड की बेहतरीन खिलाड़ी थीं। उस साल कोई पदक नहीं मिला था। वहीं प्रीति दुबे रियो डी जेनेरियो 2016 ओलंपिक में महिला हॉकी टीम से खेली थीं। वह फारवर्ड खिलाड़ी हैं। इस बार चयन नहीं किया गया है।



 
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