गोरखपुर में परफार्मेंस ग्रांट घोटाले के मामले में जिला प्रशासन की तरफ से की गई बड़ी कार्रवाई से ब्लॉक से लेकर मुख्यालय तक के अफसरों-कर्मचारियों में हड़कंप मचा है। दोषी पाए गए पूर्व प्रधान से लेकर सचिव और एडीओ पंचायत अब बचाव में जुट गए हैं। कोई जनप्रतिनिधियों को साधने में जुटा है तो कोई शासन में पैरवी करने में जुट गया है। वहीं कुछ सचिव व एडीओ कार्रवाई संबंधी आदेश का इंतजार कर रहे हैं ताकि मजमून के हिसाब से बचाव की रणनीति बना सकें।
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परफार्मेंस ग्रांट घोटाले के मामले में चार सचिवों को निलंबित कर दिया गया है जबकि एक को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। इसी तरह डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने निदेशक पंचायतीराज से चरगांवा के एडीओ पंचायत श्रीकृष्ण वर्मा को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई करने एवं सेवानिवृत्त हो चुके भरोहिया के पूर्व एडीओ पंचायत ओमप्रकाश यादव पर विभागीय कार्रवाई के लिए संस्तुति की है।
परफार्मेंस ग्रांट में अनियमितता के मामले में डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/अपर उपजिलाधिकारी सदर अनुराज जैन की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी की जांच में चार ग्राम पंचायतों में अनियमितता की पुष्टि हुई है जिस पर यह कार्रवाई की गई है। यही नहीं इस मामले में मुख्यालय स्तर पर भी गड़बड़ी के साक्ष्य मिले हैं। यहां कार्यरत सहायक जिला परियोजना प्रबंधक (एडीपीएम) पर भी विभागीय कार्रवाई के लिए लिखा गया है। चरगांवा ब्लॉक क्षेत्र में तैनात ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (आरईएस) के अवर अभियंता (जेई) ब्रह्म प्रकाश के निलंबन की संस्तुति भी हुई है।
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जिले की 37 पंचायतों को आंवटित हुए हैं 300 करोड़ रुपये
परफार्मेंस ग्रांट के रूप में जिले की 37 पंचायतों को करीब 300 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत को तीन करोड़ रुपये से लेकर 25 करोड़ रुपये तक आवंटित हैं। तीन गांव नगर निगम की सीमा में चले जाने के बाद अब इसका लाभ 34 पंचायतों को ही मिलेगा। पंचायत चुनाव के पहले इन सभी पंचायतों के खातों में 50-50 लाख रुपये भेज दिए गए थे। प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के ठीक पहले पांच गांवों में अनियमित रूप से धनराशि निकालने का मामला प्रकाश में आया था।
इन ग्राम पंचायतों के सचिवों पर हुई कार्रवाई
भटहट ब्लॉक की ग्राम पंचायत जंगल हरपुर में 47 लाख रुपये एक ही फर्म को ट्रांसफर कर दिए गए थे मगर सचिव से जानकारी मिलने पर सीडीओ एवं डीपीआरओ ने लखनऊ संपर्क कर भुगतान रुकवाया था। बाद में यह रकम पंचायत के खाते में आ गई थी। यहां के सचिव नागेंद्र देव पांडेय को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। इसी तरह पिपरौली की ग्राम पंचायत जंगल रानी सुहास कुंवरी में वित्तीय स्वीकृति के बिना ही 45 लाख रुपये निकाल लेने का मामला सामने आया। जांच में अनियमितता मिलने पर यहां के सचिव राकेश तिवारी को निलंबित कर दिया गया है।
चरगांवा ब्लॉक के ग्राम पंचायत परमेश्वरपुर में 49 लाख रुपये अधिक निकालने के मामला सामने आया था। एक फर्म को धनराशि का भुगतान भी कर दिया गया। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर पंचायत सचिव राजकिशोर सिंह को शुरू में ही निलंबित कर दिया गया, वह अब तक निलंबित है। नवसृजित भरोहिया ब्लॉक के तुर्कवलिया गांव में करीब 22 लाख रुपये के गबन का मामला मिला था। यहां के सचिव रहे सुधीर कुमार गुप्ता को निलंबित कर दिया गया है और एडीओ पंचायत रहे ओमप्रकाश यादव पर विभागीय कार्रवाई को कहा गया है। ओमप्रकाश इस समय सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
बेेलघाट ब्लॉक की ग्राम पंचायत कटया में 48 लाख रुपये निकाल लिए गए हैं। यहां के सचिव संदीप सिंह को भी निलंबित किया जा चुका है। जिन गांवों में अनियमितता मिली है, वहां ग्राम विकास विभाग के सचिव कार्यरत थे। सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी होगी।
जिन ग्राम पंचायतों में अनियमितता सामने आई है वहां के पूर्व प्रधानों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। डीएम ने संबंधित ब्लॉकों के बीडीओ को अनियमितता में लिप्त ब्लाक के कार्मिकों, तत्कालीन प्रधानों एवं संबंधित फर्म के संचालकों के खिलाफ स्थानीय थाने में मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया है। इन सभी पंचायतों में चुनाव के बाद प्रधान बदल गए हैं।
परफार्मेंस ग्रांट में अनियमितता को लेकर शिकायतों के बाद पांच गांवों की जांच कराई गई थी। एक गांव में भुगतान नहीं हो पाया था, वहां के सचिव को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। चार गांवों में अनियमितता की पुष्टि पर वहां के सचिवों को निलंबित किया जा चुका है। चरगांवा के एडीओ पंचायत को निलंबित करने की संस्तुति की गई है। भरोहिया के तत्कालीन एडीओ पंचायत की भी संलिप्तता मिली है। वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए लिखा गया है। -इंद्रजीत सिंह, सीडीओ