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Gorakhpur News: सरगना की गिरफ्तारी के बाद लोनी गैंग के तीन और गुर्गे दबोचे

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गगहा पुलिस ने बिना नंबर के पिकअप से गोवंश ले जाते पकड़ा
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पिकअप को बैकअप दे रही दो बाइक भी पकड़ी गईं, गैंग के छह आरोपी जा चुके हैं जेल



अमर उजाला ब्यूरो



गोरखपुर। पशु तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत गगहा थाना पुलिस ने लोनी गैंग के सरगना संजय की गिरफ्तारी के बाद गिरोह के तीन और गुर्गों को दबोच लिया है। पुलिस ने बिना नंबर प्लेट की पिकअप से दो गोवंश बरामद किए हैं। साथ ही पिकअप को बैकअप दे रहीं दो बाइक भी कब्जे में ली गई हैं। अब तक इस गैंग के छह आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं।



पुलिस के मुताबिक, बुधवार की रात करीब 12 बजे गगहा थाना प्रभारी अंजुल चतुर्वेदी पुलिस टीम के साथ गश्त पर थे। इसी दौरान सूचना मिली कि श्रीराम चौराहे की ओर से कुछ तस्कर गोवंश लेकर गुजरने वाले हैं। पुलिस ने स्थानीय चौकी प्रभारी की मदद से घेराबंदी की। कुछ ही देर में बिना नंबर प्लेट लगी एक पिकअप आती दिखी। पुलिस ने रोकने का प्रयास किया तो चालक ने गाड़ी किनारे खड़ी कर दी और पीछे से आ रहे दो बाइक सवारों के साथ भागने की कोशिश की।
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हालांकि पुलिस ने पीछा कर तीनों को मौके पर ही पकड़ लिया। तलाशी के दौरान पिकअप से दो गोवंश बरामद किए गए। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान खजनी के उनवल वार्ड नंबर सात निवासी मिठाई लाल, गगहा के देउरबीर निवासी मदनी कुमार और संतकबीरनगर के कोतवाली खलीलाबाद, जंगल उन बउरहवा निवासी गुड्डू लोना के रूप में हुई।



पुलिस के अनुसार, गुड्डू लोना बिहार के लोना गिरोह से जुड़ा है और यहां स्थानीय स्तर पर संजय के साथ नेटवर्क संचालित करता था। जांच में सामने आया कि मिठाई लाल और मदनी कुमार बाइक से आगे-पीछे चलकर पिकअप को सुरक्षा देते थे। ये दोनों क्षेत्र में घूमकर खुले में या घरों के बाहर बंधे गोवंश की रेकी करते थे और सूचना गुड्डू लोना को देते थे। इसके बाद गोवंश को पिकअप पर लादकर बिहार स्थित गिरोह तक पहुंचाया जाता था।

वर्जन



बरामद दोनों गोवंश को पशु आश्रय केंद्र में सुरक्षित रखवाया गया है। तीनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया। पुलिस अब गिरोह के अन्य गुर्गों की तलाश में जुटी है और नेटवर्क की पूरी कड़ी खंगाल रही है।
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-दिनेश पुरी, एसपी उत्तरी







बिहार में बैठा आजाद पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड



पुलिस के मुताबिक, इस तस्करी नेटवर्क का मास्टरमाइंड आजाद बिहार में बैठकर पूरे गिरोह को आबाद के जरिये फाइनेंस करता है। पशुओं को उठाने से लेकर उन्हें राज्य की सीमा पार पहुंचाने तक का खर्च वही वहन करता है। स्थानीय स्तर पर जुड़े गुर्गे केवल रेकी और परिवहन का काम करते थे। पुलिस उसके लोकल नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।
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