नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में पार्षद वरीयता के रूप में 30-30 लाख रुपये के प्रावधान पर असमंजस की स्थिति बन गई। इसको लेकर काफी हंगामे वाली स्थिति बनी रहीं। दरअसल सिविल लाइंस एक के पार्षद अजय राय ने मामला उठाते हुए कहा कि नगर निगम कार्यकारिणी बैठक में पार्षद वरीयता के लिए 30-30 लाख रुपये को मंजूरी दी गई थी, लेकिन बजट में इसके लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
ऐसे में बजट में संशोधन करते हुए पार्षद वरीयता के मामले को शामिल किया जाए। लेकिन नगर आयुक्त अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि कार्यकारिणी की बैठक में ऐसे किसी प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी गई। कहा कि नगर निगम की आर्थिक स्थिति को देखते हुए ऐसा कर पाना संभव ही नहीं होगा। इसके बाद पार्षदों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। इसके बाद मेयर सीताराम जायसवाल ने कहा कि कार्यकारिणी बोर्ड ने पार्षद वरीयता के रूप में हरेक वार्ड में 30-30 लाख रुपये के काम को स्वीकृति दी गई है। लेखाधिकारी अमरेंद्र बहादुर पाल ने इस पर हामी भरते हुए कहा कि बजट में इसके लिए प्रावधान भी कर दिया गया है। तब जाकर मामला शांत हुआ।
शौकत अली को भूमि आवंटन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से खारिज
नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में सपा पार्षदों द्वारा खूनीपुर निवासी शौकत अली को 527 वर्गफीट भूमि आवंटित करने की मांग रखी, जिसका भाजपा पार्षदों ने पुरजोर विरोध किया था। नगर निगम बोर्ड में फिर से इस प्रस्ताव को रखा गया, लेकिन बहुमत के आधार पर शौकत अली को लीज पर जमीन देने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया।
महादेव झारखंडी में करीब 150 हेक्टेयर जमीन एम्स में इलाज के आने वाले मरीजों के परिजनों की सुविधा के लिए आवासीय भवन निर्माण के लिए सेवा भारती( गोरक्ष प्रांत, माधव धाम, दयानंद मार्ग राजेंद्र नगर पूर्वी गोरखपुर) को देने को पार्षदों ने ध्वनि मत से मंजूरी दे दी।
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की मदद से दुरुस्त होगी स्ट्रीट लाइट व्यवस्था
कई पार्षदों ने शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लेकर काफी नाराजगी जताई। कहा गया कि मेंटेनेंस की जिम्मेदार कंपनी ईईसीएल की लापरवाही से शहर में 70 प्रतिशत से ज्यादा स्ट्रीट लाइट खराब है। कंपनी की ओर से ठीक नहीं किया जा रहा है। कार्यकारिणी सदस्य जियाउल इस्लाम ने व्यवस्था होने तक आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सहायता से इसे दुरुस्त रखने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सभी पार्षदों का साथ मिला और सदन ने ध्वनि मत से इसे पास कर दिया। वहीं नगर आयुक्त अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि आउटसोर्सिंग पर आने वाले खर्च को कंपनी से कटौती की जाए। साथ ही कंपनी को एक कड़ा पत्र लिखते हुए शासन को कंपनी की लापरवाही से अवगत कराया जाए।
नगर निगम अभी है 127 करोड़ का देनदार
नगर निगम के अधिकारियों की तरफ से बताया गया कि नई बोर्ड के समय नगर निगम पर 127 करोड़ रुपये की लायबिल्टी थी, लेकिन अब सिर्फ 40 करोड़ रुपये की देनदारी रह गई है। 8 करोड़ की देनदारी निर्माण विभाग की बची है। मेयर ने बताया कि अगले सत्र तक नगर निगम की किसी प्रकार की देनदारी नहीं रह जाएगी। जिससे विकास कार्यों में तेजी आएगी।