गोरखपुर में सफेद कपड़े में लिपटे पिता डॉ. परमात्मा सिंह का शव सामने था। सात साल की पर्णिका सिंह उर्फ बिन्नी को पहले समझ ही नहीं आया कि जमीन पर लेटे पापा अब कभी उठेंगे नहीं। अर्थी उठने से पहले अंतिम दर्शन के दौरान बिन्नी को बुलाया। बिन्नी ने पिता को देखा तो उसे बताया गया कि पापा अब इस दुनिया में नहीं रहे। यह सुनते ही वह फफक पड़ी। आंखों से आंसू बहने लगे और वह बार-बार कहती रही- ‘पापा, प्लीज लौट आओ।’
कुछ देर तक वह पिता के पास खड़ी उन्हें निहारती रही। फिर बड़े भाई 12 वर्षीय अरिहंत सिंह से लिपटकर रोने लगी। बच्चों के लिए यह समझ पाना मुश्किल था कि जिस पिता के साथ वे रोजमर्रा की जिंदगी जीते थे, वह अब उनके बीच नहीं हैं। रिश्तेदार और आसपास मौजूद लोग दोनों बच्चों को संभालते रहे। वहीं डॉ. परमात्मा की पत्नी डॉ. सुमित्रा सिंह भी पति की मौत से बदहवास थीं। मां कुंती सिंह व बहनों प्रतिभा, आभा, रंजना, नूतन व आस्था का रो-रोकर बुरा हाल था।
‘दो दिन पहले आती तो शायद भैया को बचा लेती’
भाई की मौत की खबर मिलते ही डॉ. परमात्मा की छोटी बहन रंजना सिंह भी अपाॅर्टमेंट पहुंचीं थीं। शव देखते ही वह चीख-चीखकर रोने लगीं। उनके मुंह से बार-बार यही निकल रहा था कि अगर वह दो दिन पहले आ जातीं तो शायद भाई को समझाकर बचा लेतीं। रंजना ने बताया कि दो दिन पहले भाभी ने फोन किया था। उन्होंने बताया था कि भाई एक लोन के मामले में फंस गए हैं और काफी तनाव में चल रहे हैं।
यह सुनकर रंजना ने भाई के पास आने और उनसे बात कर समझाने की बात कही थी। मगर वह गोरखपुर पहुंच पातीं, उससे पहले ही भाई ने अपनी जान दे दी। भाई को याद कर रंजना कहती रहीं, ‘भाभी ने दो दिन पहले बताया था। मैं आकर भैया को समझाने वाली थी। अगर उसी समय आ जाती तो शायद आज भैया हमारे बीच होते।’ परिजन ने उन्हें संभाला, लेकिन भाई को खोने का दर्द उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था।
मासूम बच्चों के सिर से उठ गया पिता का साया
डॉ. परमात्मा की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। सबसे मुश्किल स्थिति उन दोनों बच्चों के लिए है, जिन्होंने अचानक अपने पिता को खो दिया। बिन्नी की पिता को वापस बुलाने की मासूम गुहार वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर गई।
परिवार के लोग बच्चों को संभालने में जुटे रहे। मां डॉ. सुमित्रा सिंह का भी रो-रोकर बुरा हाल था। जिस घर में बच्चों की पढ़ाई, भविष्य और परिवार की खुशियों की बातें होती थीं, वहां अचानक मातम छा गया। पिता के शव के पास बैठकर रोते बच्चों को देखकर रिश्तेदारों और पड़ोसियों की आंखें भी नम हो गईं।
हर साल रक्षाबंधन पर डॉ. परमात्मा के घर पहुंचती थीं बहनें
डॉ. परमात्मा पांच बहनों के इकलौते भाई थे। हर साल रक्षाबंधन पर बहनें प्रतिभा, आभा, रंजना, नूतन और आस्था भाई की कलाई पर राखी बांधने उनके घर पहुंचती थीं। इस बार भी त्योहार पर मिलने की तैयारी थी लेकिन उससे पहले ही डॉ. परमात्मा ने अपनी जान दे दी। भाई की मौत की खबर से पांचों बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था। जिस घर में कुछ दिन बाद राखी की खुशियां और भाई-बहनों की हंसी गूंजनी थी, वहां मातम पसरा था।
बहनें भाई को याद कर बार-बार बिलख उठतीं। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि इस बार रक्षाबंधन पर उनकी राखी की थाली तो सजेगी, लेकिन भाई की कलाई सामने नहीं होगी। परिवार के लोगों के मुताबिक, डॉ. परमात्मा बहनों के बेहद करीब थे और सभी बहनों के सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहते थे। भाई की मौत ने बहनों से त्योहार की खुशियां भी छीन लीं।
1.40 करोड़ की ठगी के शिकार पशु चिकित्सक ने आठवीं मंजिल से कूदकर दी जान
गोरखपुर में 1.40 करोड़ रुपये की ठगी के शिकार और मुकदमे के वादी पशु चिकित्सक डॉ. परमात्मा सिंह (42) ने बृहस्पतिवार सुबह गोरखनाथ के बसंत इंक्लेव अपाॅर्टमेंट की आठवीं मंजिल से छलांग लगाकर जान दे दी। करीब 9:30 बजे हुई घटना के बाद परिजन उन्हें निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। उनकी जेब से मिले सुसाइड नोट में ठगी के मुकदमे में नामजद गरिमा सिंह को मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
सूचना पर पहुंची फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए और पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। मूलरूप से मऊ के बरबोझी मोहम्मदाबाद निवासी डॉ. परमात्मा सिंह महाराजगंज के रतनपुर में पशु चिकित्सक के पद पर तैनात थे। वह पत्नी डॉ. सुमित्रा सिंह और दो बच्चों रिहंत सिंह (12) और बेटी पार्णिका (08) के साथ राजेंद्र नगर स्थित बसंत इंक्लेव के फ्लैट नंबर बी-213 में रहते थे। पत्नी भी नौतनवां ब्लॉक के सिसवां बसंतपुर में पशु चिकित्सक हैं।
पत्नी के मुताबिक, सुबह बच्चों को स्कूल छोड़कर लौटने के बाद परमात्मा करीब 9:13 बजे कपड़े सुखाने के लिए आठवीं मंजिल पर गए थे। कुछ देर बाद उनके वहां से गिरने की सूचना मिली। करीब 9:30 बजे अपॉर्टमेंट के लोगों ने उनको बताया। 9:40 बजे पीआरवी-112 से सूचना मिलने पर पुलिस फॉरेंसिक टीम के साथ पहुंची। तलाशी में उनकी जेब से सुसाइड नोट मिला। इसमें उन्होंने अपनी मौत का जिम्मेदार गरिमा सिंह को ठहराया था। पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में लेने के साथ ही शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया।
पांच अगस्त को दर्ज कराई थी 1.40 करोड़ की ठगी की प्राथमिकी
पुलिस के मुताबिक, डॉ. परमात्मा ने पांच अगस्त को एम्स थाने में 1.40 करोड़ रुपये की ठगी की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें पीएचडी महिला गरिमा सिंह, उसके रेलवे अधिकारी पिता ध्रुव नारायण सिंह, शिक्षक पति समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने गरिमा और उसके पिता को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार, ठगी के बाद बैंक से रकम की रिकवरी का दबाव था। करोड़ों रुपये के लोन की जानकारी सामने आने के बाद परिवार में भी तनाव बढ़ गया था।
पांच बहनों में इकलौते थे डॉ. परमात्मा
बेटे डॉ. परमात्मा की मौत की खबर पर पिता पारसनाथ सिंह और मां कुंती सिंह पूर्वांह्न 11:30 बजे गोरखपुर पहुंचे। अपॉर्टमेंट के बाहर भीड़ देखकर दोनों स्तब्ध रह गए। पिता ने बताया कि परमात्मा 28 जुलाई को गांव आए थे। परिवार आर्थिक रूप से संपन्न है और खेती-बाड़ी भी ठीक है।
उनका कहना था कि लोन चुकाया जा सकता था, फिर बेटे ने ऐसा कदम क्यों उठाया, यह समझ नहीं आ रहा। परमात्मा पांच बहनों प्रतिभा, आभा, रंजना, नूतन व आस्था में तीसरे नंबर पर थे। ये कहते हुए उनकी आंखें भर आईं। वहीं कुंती देवी, डॉ. परमात्मा की पत्नी व बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। हादसे की खबर सुनकर स्कूल से घर लौटे बच्चे अपनी मां से लिपट कर रोने लगे।
सुसाइड नोट बरामद हुआ है। जालसाजों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा भी बढ़ाई जाएगी। साथ ही जांच के दौरान इस मुकदमे से जुड़े घटनाक्रम को भी ध्यान में रखा जा रहा है
।- डॉ. कौस्तुभ, एसएसपी